Home पशुपालन GADVASU Pashu Mela: पशु मेले में थनैला रोग समेत कई बीमारियों और, चारे के नमूनों की फ्री होगी जांच
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GADVASU Pashu Mela: पशु मेले में थनैला रोग समेत कई बीमारियों और, चारे के नमूनों की फ्री होगी जांच

Animal Husbandry Fair in Gadvasu
गडवासु में मेले की तैयारी को अंतिम रूप दिया गया

नई दिल्ली. गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, लुधियाना 20 और 21 मार्च को दो दिवसीय ‘पशु पालन मेला’ आयोजित करेगा. किसानों में इस मेले में भाग लेने को लेकर भारी उत्साह है, जो किसानों द्वारा पूछे जा रहे सवालों से साफ ज़ाहिर होता है. मेले के बारे में जानकारी देते हुए, कुलपति डॉ. जतिंदर पाल सिंह गिल ने कहा कि यह मेला दूसरे राज्यों के किसानों को भी आकर्षित कर रहा है. आस-पास के राज्यों के विभिन्न संबंधित विभाग, विकास विभाग और अन्य हितधारक भी इस मेले में भाग ले रहे हैं.

उन्होंने कहा कि इस बार हम मेले का आयोजन ‘पशुधन पालन स्थानीय ताकत से वैश्विक मानकों तक’ (Livestock Farming: Local strength to Global standards) की थीम पर कर रहे हैं. इसके तहत, हमने अपनी पारंपरिक और प्रथागत संरचना के फायदों का सम्मान करते हुए, वैश्विक सोच, ज़रूरतों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाने का संकल्प लिया है. राज्य में वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के लिए, विश्वविद्यालय मेले में भैंस, मछली, सुअर और बकरी श्रेणियों में चार सर्वश्रेष्ठ किसानों को “मुख्यमंत्री पुरस्कार” भी प्रदान करेगा.

क्या होगी मेले की खास बात, जानें यहां
विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. रविंदर सिंह ग्रेवाल ने कहा कि पशु पालन मेले में विश्वविद्यालय अपनी तकनीकों का प्रदर्शन करेगा और प्रदर्शनी तथा वैज्ञानिकों के साथ किसानों की बातचीत के माध्यम से ज्ञान प्रदान करेगा.

दोनों दिनों वैज्ञानिक पशुधन, मछली और मुर्गी पालन के विभिन्न पहलुओं पर तकनीकी व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे.

ताकि किसान उन सर्वोत्तम प्रथाओं को अपना सकें जो उनके अपने-अपने स्थानों के लिए उपयुक्त हैं. किसानों के लिए सभी दिनों प्रश्न-उत्तर सत्र भी आयोजित किए जाएंगे.

मेले में, विश्वविद्यालय के बेहतरीन पशुओं जैसे गाय, भैंस, बकरी, सुअर और मुर्गियों – का प्रदर्शन किया जाएगा.

ताकि किसानों को विश्वविद्यालय से बेहतरीन जर्मप्लाज्म (बीज) का चयन करके बेहतर पशुधन तैयार करने के लिए प्रेरित किया जा सके.

सभी पशुधन, मुर्गी पालन और मत्स्य पालन से संबंधित विश्वविद्यालय का साहित्य, पशुपालन के लिए ‘प्रक्रियाओं का पैकेज’ (Package of Practices) और पत्रिका ‘विगियानक पशु पालन’ भी किसानों के लिए उपलब्ध होगी.

डॉ. ग्रेवाल ने आगे कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किया गया क्षेत्र-विशेष खनिज मिश्रण, यूरोमिन लिक (uromin lick) और बाईपास फैट भी नाममात्र दरों पर बेचा जाएगा.

मेले में गेहूं के भूसे का यूरिया उपचार, यूरोमिन लिक और बाईपास फैट बनाने की विधि, थन डुबोने की प्रक्रिया (teat dip practice) और कीटनाशक दवा का प्रदर्शन किया जाएगा.

पशुपालक किसानों को थनैला रोग (mastitis), आंतरिक परजीवियों, दूध, चारे के नमूनों और चारे में नाइट्रेट विषाक्तता की जांच की सुविधा भी प्रदान की जाएगी.

किसान विभिन्न बीमारियों की जांच करवाने के लिए खून, गोबर, पेशाब और त्वचा के नमूनों को जांच के लिए ला सकते हैं.

मेले के दिनों में यह जांच सुविधा निःशुल्क रहेगी. जानवरों के साथ-साथ इंसानों में भी ब्रूसेलोसिस की जाँच की जाएगी.

दूध में पाए जाने वाले पाँच आम मिलावटी पदार्थों—जैसे चीनी, स्टार्च, यूरिया, न्यूट्रलाइज़र और हाइड्रोजन पेरोक्साइड—की जाँच के लिए एक ‘मिल्क टेस्टिंग किट’ भी बिक्री के लिए उपलब्ध रहेगी.

पशुपालन से जुड़ी विभिन्न कंपनियाँ—जैसे दवा कंपनियाँ, पशु आहार (Cattle Feed), सीमेन, उपकरण, मशीनरी, चारे के बीज, फ़ीड सप्लीमेंट्स आदि—इस प्रदर्शनी में अपने स्टॉल लगा रही हैं.

विश्वविद्यालय के तत्वावधान में विभिन्न किसान संगठन भी अपने स्टॉल लगाएंगे और अपनी गतिविधियों का प्रदर्शन करेंगे.

Written by
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