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Dairy Animal: पशुपालन को बढ़ावा देने और बीमारियों को रोकने के लिए सरकार ने किए ये काम, जानें यहां

गर्मियों में पशु बहुत जल्द बीमार होते हैं. अगर ठीक से इनकी देखरेख कर ली जाए तो हम पशुओं को बीमार होने से बचा सकते हैं.
प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली. केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग पशुपालन करें. पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार किसानों की मदद भी कर रही है. ताकि किसानों की आय दोगुनी हो जाए और कृषि के अलावा उनके पास पशुपालन का भी जरिया हो, अपनी आजीविका चलाने के लिए. इसी के तहत सरकार की ओर से साल 2019 में पहली बार किसाान क्रेडिट कार्ड की सुविधाओं का विस्तार किया गया था. इसके बारे में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन ने बताया कि पशुपालन व किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की सुविधाओं का विस्तार किया है ताकि उन्हें उनकी कार्यशील पूंजीगत जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सके.

उन्न्होंने बताया कि आत्मनिर्भर भारत अभियान प्रोत्साहन पैकेज के हिस्से के रूप में, वर्ष 2020 में 15,000 करोड़ रुपये का पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ) लॉन्च किया गया था. एएचआईडीएफ डेयरी, प्रजनन, मांस प्रोसेसिंग, पशु चारा प्लांट्स की स्थापना के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चरर्स की स्थापना में निवेश की सुविधा प्रदान करता है. एएचआईडीएफ की सफलता को ध्यान में रखते हुए, पहले डेयरी प्रोसेसिंग विकास निधि को फरवरी 2024 को एएचआईडीएफ में मिला दिया गया है.

कई परियोजनाओं की हुई शुरुआत
अब निधि का कुल आकार 29110 करोड़ रुपये है. आज की तारीख तक योजना के तहत 11,500 करोड़ रुपए की परियोजना लागत से कुल 420 परियोजनाओं को मंजूरी की गई हैं. उन्होंने बताया कि सरकार राष्ट्रीय पशुधन मिशन को अमल में ला रही है. जिसका टारगेट पोल्ट्री, भेड़, बकरी, आहार और चारा विकास के साथ-साथ नस्ल सुधार कर व्यवसाय का विकास करना है. मिशन पशुधन क्षेत्र के पूरे विकास के लिए घोड़े, गधे, खच्चर और ऊंट पर भी ध्यान केंद्रित करता है. जोखिम के समय के लिए योजना के तहत पशुधन बीमा के लिए सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है.

बीमारियों को रोकने के लिए किया ये काम
केंद्रीय मंत्री रंजन ने बताया कि सरकार ने अब तक खुरपका और मुंहपका रोग (एफएमडी), ब्रुसेलोसिस, पेस्टे डेस पेटिट्स रोमिनेंट्स (पीपीआर) और क्लासिकल स्वाइन ज्वर (सीएसएफ) के लिए टीकाकरण कार्यक्रम को अमल में लगाया. अब तक एफ़एमडी के लिए 85 करोड़ टीकाकरण किया गया है, जिससे देश भर में 7.09 करोड़ किसानों को फायदा हुआ है. ब्रुसेलोसिस को कंट्रोल करने के लिए लगभग 3.92 करोड़ बछड़ों और बछड़ियों को ब्रुसेलोसिस के लिए टीका लगाया गया, अब तक 14.66 करोड़ पशुओं को पीपीआर और 55 लाख से अधिक पशुओं को क्लासिकल स्वाइन ज्वर के लिए टीका लगाया जा चुका है. पहली बार भारत सरकार पूरे देश में मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों (एमवीयू) की स्थापना कर रही है. पशुपालन कार्यकलापों में लगे 10 करोड़ किसानों को उनके घर पर पशुधन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी. 27 राज्यों में 3165 एमवीयू चल रही है.

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