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Government Scheme: सरकारी योजना के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं को मिलेगा इलाज, युवाओं को रोजगार

सदैव स्वस्थ एवं सुडौल शरीर वाले पशु ही खरीदना चाहिए.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. पशुओं को कई बार मामूली समस्या होती है लेकिन फर्स्ट एड न मिलने के कारण समस्या गंभीर हो जाती है. इससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ जाता है. जिसके चलते पशुपालकों को पशुपालन के काम में नुकसान होता है. इसको देखते हुए मध्य प्रदेश की सरकार की ओर से गौसेवक प्रशिक्षण (प्रारंभिक एवं रिफ्रेशर) योजना की शुरुआत की गई है. इस योजना का फायदा ये है कि बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिल जाएगा और पशुओं को समय पर इलाज हो जाएगा. इससे उनकी समस्या गंभीर नहीं होगी.

गौरतलब है कि पशुपालन में पशुओं में होने वाली बीमारी के कारण सबसे ज्यादा नुकसान होता है. इससे पशुपालक बहुत परेशान रहते हैं. उनकी पशुपालन की लागत भी इसी के चलते बढ़ जाती है. इसलिए बेहद ही जरूरी है कि पशुपालन में पशुओं को बीमारियों से बचाया जाए. मध्य प्रदेश सरकार राज्य को मिल्क कैपिटल बनाना चाहती है. इसके लिए पशुओं को हैल्दी रखना जरूरी है.

चिकित्सा सेवा होगी उपलब्ध
योजना का उद्देश्य शिक्षित बेरोजगार ग्रामीण युवकों को स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक पशु चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराना है.

प्रांरभिक प्रशिक्षण के लिए सभी वर्ग के 10वीं पास 18 से 35 वर्ष की उम्र के शिक्षित ग्रामीण बेरोजगार की जरूरत है.

चयन प्रक्रिया की बात करें तो प्रांरभिक प्रशिक्षण के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत से वहॉं के निवासी का सेलेक्शन होगा.

10वीं पास शिक्षित ग्रामीण बेरोजगार का चयन जनपद पंचायत के अनुमोदन पर किया जाएगा.

रिफ्रेशर प्रशिक्षण के लिए प्रारंभिक प्रशिक्षण प्राप्त गौसेवकों का वरिष्ठता के आधार पर चयन किया जाएगा.

प्रारंभिक प्रशिक्षण पाने वालों को 1000 रुपए प्रतिमाह का मानदेय छह माह के लिए दिया जाएगा.

वहीं 1200 रुपए की किट भी दी जाएगी. इस तरह सरकार का 7200 रुपए प्रति गौसेवक पर खर्च आएगा.

रिफ्रेशर प्रशिक्षण के लिए 500 रुपए मानदेय और 100 रुपए की पाठ्य सामग्री पर खर्च होगा. इस तरह सरकार 600 रुपए खर्च करेगी.

इस योजना का फायदा लेने के लिए संबंधित जिले के निकटतम पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु औषधालय के प्रभारी और उपसंचालक पशु चिकित्सा से संपर्क करें

निष्कर्ष
योजना उन युवाओं के लिए बेहतर है जो बेरोजगार है. यहां ट्रेनिंग लेकर बाद में वो खुद का पशुपालन बिजनेस शुरू करते हैं तो पशुओं की बीमारियों से अच्छी तरह वाकिफ होने के चलते नुकसान नहीं होगा.

Written by
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