नई दिल्ली. केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 15 जून 2026 को भोजपुर में 31.21 करोड़ रुपये के कुल निवेश वाले टीग्रेइंटेड एक्वा पार्क की आधारशिला रखी. पटना में एनएफडीबी क्षेत्रीय केंद्र का उद्घाटन भी किया. इन पहलों का उद्देश्य आधुनिक प्रौद्योगिकियों, वैज्ञानिक संसाधन प्रबंधन, रोजगार सृजन एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से बिहार के अंतर्देशीय मत्स्य पालन पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना है. साथ ही, ये पहल मत्स्य क्षेत्र को प्रौद्योगिकी-संचालित, गुणवत्ता-केंद्रित एवं निर्यातोन्मुखी क्षेत्र बनाने की दिशा में सहयोग प्रदान करेंगे.
बिहार में पानी का विशाल संसाधन मौजूद है, जिनमें 1.22 लाख हेक्टेयर में फैले तालाब और पोखर, 0.64 लाख हेक्टेयर के जलाशय, 9.5 लाख हेक्टेयर की बाढ़-मैदान वाली झीलें और बेकार पड़े हुए जल-क्षेत्र और 21,354 किलोमीटर से ज़्यादा लंबी नदियां एवं नहरें शामिल हैं. यहां उत्पादन होने वाली मुख्य मछलियों में कतला, रोहू, मृगल, ग्रास कार्प, कॉमन कार्प, सिल्वर कार्प, पाबदा, तिलापिया, पैंगैसियस, मांगुर, स्कैम्पी और सजावटी मछलियां शामिल हैं. इन समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों के कारण बिहार के लिए अंतर्देशीय मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक अग्रणी केंद्र बनने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं.
902 करोड़ की परियोजना को मिली मंजूरी
भारत सरकार ने पिछले 11 वर्षों में बिहार के लिए 902.84 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की है, जिसमें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत 579.72 करोड़ रुपये शामिल हैं.
इन निवेशों से मज़बूत अवसंचरना प्राप्त हुआ है, जिसमें ब्रूड बैंक, हैचरी, आरएएस और बायोफ्लॉक इकाई, मत्स्य आहार संयंत्र, कोल्ड-चेन, ट्रांसपोर्ट की सुविधाएं और जलीय रेफरल प्रयोगशालाएं शामिल हैं.
इसके परिणामस्वरूप बिहार में मछली उत्पादन दोगुने से भी ज्यादा हो चुका है, जिससे बिहार अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन करने वाले राज्यों में 9वें स्थान से बढ़कर 4वें स्थान पर पहुंच चुका है.
बिहार अब प्रतिवर्ष लगभग 89,600 मीट्रिक टन मछली की आपूर्ति पड़ोसी राज्यों को करता है और इस क्षेत्र मे एक शुद्ध निर्यातक बन चुका है.
बिहार में एक आर्द्रभूमि मत्स्य पालन समूह को अधिसूचित किया गया है, जिसमें लगभग 9.5 लाख हेक्टेयर बाढ़ के मैदानों की झीलें एवं बेकार पड़े जल-निकाय को शामिल किया गया है.
इस क्लस्टर का उद्देश्य समुदाय-आधारित मछली पालन प्रबंधन, समन्वित स्टॉकिंग एवं उत्पादन के बाद साझा अवसरचना को बढ़ावा देना है ताकि बिहार के आर्द्रभूमियों की उत्पादन क्षमता संसाधनों की उत्पादक क्षमता का पूरा लाभ किया जा सके.
पीएमएमएसवाई के अंतर्गत भोजपुर के वनसौर फिश सीड फ़ार्म में इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क को कुल 31.21 करोड़ रुपये की मंज़ूरी प्रदान की गई है.
इस एक्वा पार्क में कार्प और कैटफ़िश हैचरी, ब्रूडर इनक्यूबेशन यूनिट, बायोफ़्लॉक प्रणाली, आरएएस इकाई, फ़िश फ़ीड मिल, पानी की गुणवत्ता और बीमारी की जांच करने वाली प्रयोगशालाएं, क्वारंटीन सुविधाएं और 50 बिस्तरों वाला ट्रेनिंग हॉस्टल शामिल होंगे.











