नई दिल्ली. मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के तहत फायदा पाने वाले को दुग्ध संग्रहण और बिक्री की मजबूत व्यवस्था उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएं. उन्होंने कहा कि हितग्राही को उत्पादित दूध का उचित मूल्य दिलाने के लिए परिवहन व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए. विभागीय अथवा थर्ड पार्टी समन्वय से आवश्यक वाहनों की उपलब्धता पर विचार किया जाए. असल में वो पशुपालन एवं डेयरी विभाग की समीक्षा बैठक ले रहे थे और वहीं उन्होंने ये बातें कहीं.
राज्यपाल पटेल को लोक भवन में आयोजित पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारियों ने चर्चा करने के दौरान प्रदाय पशुओं के स्वास्थ्य, देखभाल एवं मॉनिटरिंग व्यवस्थाओं, हितग्राहियों को पशुपालन प्रशिक्षण, वनाधिकार पट्टा धारकों को लाभान्वित करने और हितग्राही अंशदान के संबंध जानकारी दी.
जानें राज्यपाल ने और क्या दी सलाह
राज्यपाल पटेल ने कहा है कि मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना अति-गरीब के पोषण और सतत् आजीविका की पहल है.
योजना की सफलता के लिए अति-गरीब को प्राथमिकता वितरण पद्धति का आधार होना चाहिए.
उन्होंने अति-पिछड़ी जनजातियों बैगा, भारिया और सहरिया के अति-गरीब को प्राथमिकता से लाभान्वित करने के प्रयासों पर बल दिया.
उन्होंने कहा कि आबादी के अनुपात में वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए. योजना की जानकारी के लिये अति-पिछड़ी जनजातियों के बीच प्रचार-प्रसार किया जाए.
राज्यपाल पटेल ने कहा कि पशु वितरण कार्यक्रम में लाभान्वित महिला हितग्राहियों के माध्यम से पशुपालन व्यवस्थाओं और परिवार की आय में बढ़ोतरी के संबंध में जानकारी प्रदान करने की पहल करें.
योजना की उपलब्धियों का हर साल फोटो के जरिए प्रचार प्रसार किया जाए. राज्यपाल पटेल ने गुजरात राज्य में जनजातीय बहुल क्षेत्र में दुग्ध संजीवनी योजना के अनुभवों का उल्लेख किया.
कहा कि मुख्यमंत्री पशु प्रदाय योजना के हितग्राहियों को परिवार के बच्चों के लिए दुग्ध की उपलब्धता को सुनिश्चित करने की सलाह दी जाए.
विभाग के द्वारा 2 महिला, 2 पुरुष अधिकारियों को बनासकांठा के डेयरी उद्योग का अध्ययन करने के लिए गुजरात राज्य भेजने के निर्देश दिए हैं.
राज्यपाल श्री पटेल को प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी श्री उमाकांत उमराव ने बताया कि प्रदेश के किसानों, पशुपालकों को मोबाइल पर ही पशुओं के पोषण संबंधी जानकारी दी जा रही है.
साथ ही वैज्ञानिक तरीके से पशुओं को आहार मिले, इसके लिए विभाग द्वारा गोरस मोबाइल ऐप तैयार कराया गया है. यह ऐप पूरी तरह से सरल हिंदी भाषा में विकसित किया है.
इसके लिए नेट की भी आवश्यकता नहीं है. उन्होंने बताया कि प्रदेश में ब्रीडर एसोसिएशन का विकास किया जा रहा है.
इसमें एक ही नस्ल के 20 से अधिक पशुओं के प्रमाणीकरण के द्वारा उन्नत नस्ल के पशुओं की राज्य में ही आपूर्ति के प्रयास किए गए हैं.











