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Dairy Scheme: दूध की लागत कम कर मुनाफा बढ़ा रही हैं सरकार की ये तीन योजनाएं

एक्सपर्ट कहते हैं कि सिर्फ दूध उत्पादन पर ही नहीं बल्कि दूध की क्वालिटी पर भी मौसम का असर होता है.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. देश में डेयरी बिजनेस किसानों की कमाई का अच्छा जरिया बना है. शहर हो या देहात आज दूध की मांग सभी जगह बढ़ गई है. सरकार भी डेयरी में सहयोग कर रही है. दूध की लागत कम कर कमाई बढ़ाने के लिए सरकार ने कुछ योजनाएं चलाई हैं. डेयरी, पशुपालन मंत्रालय ने जानकारी देते हुए इन योजनाओं की जानकारी दी है. आइये आपको बताते हैं, कि कौन सी योजनाएं डेयरी में मुनाफा बढ़ा रही हैं. पशुपालन एवं डेयरी विभाग महाराष्ट्र सहित पूरे देश में कई योजनाओं को चला रहा है, ताकि राज्य सरकार द्वारा दूध उत्पादन और प्रोसेसिंग के लिए किए गए प्रयासों को सफल बनाया जा सके.

ये योजनाएं सरकार द्वारा चलाई जा रही है.

राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी) डेयरी गतिविधियों में लगे डेयरी सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों को सहायता प्रदान करना (एसडीसीएफपीओ) पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ)

राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) ये योजनाएं गाय, भैंस आदि पशुओं की दूध उत्पादकता में सुधार, डेयरी डिजायन को मजबूत बनाने, चारा और चारे की मांग बढ़ाने और पशु हेल्थ सर्विस देने में हेल्प कर रही हैं. इससे दूध प्रोडेक्ट की लागत को कम करने, संगठित बाजार उपलब्ध कराने और उपज के लाभकारी मूल्य के साथ डेयरी फार्मिंग से इनकम बढ़ाने में भी हेल्प करते हैं.

इसके अलावा, मराठवाड़ा क्षेत्र में डेयरी और पशुपालन को बढ़ाने के लिए स्कीम हैं. विदर्भ और मराठवाड़ा डेयरी विकास परियोजना (VMDDP): महाराष्ट्र सरकार (GoM) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र में डेयरी उत्पादन को बढ़ाने और छोटे किसानों की रोजी में सुधार लाने के लिए शुरू किया गया था. यह प्रोजेक्ट अक्टूबर 2016 में शुरू हुआ था, जिसमें पहले दिन 12 गांवों से 175 किलोग्राम दूध कलेक्ट किया गया था. तब से इसका विस्तार 3,411 गांवों तक हो गया है, जिसमें 35,000 दूध देने वाले शामिल हैं और हाल में दूध की खरीद में औसतन 4.50 लाख किलोग्राम/दिन है. शुरुआत से लेकर 20 फरवरी 2025 तक, 2303.26 करोड़ रुपये सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा किए गए हैं.

पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी), भारत सरकार (जीओआई) की राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) योजना के तहत स्वीकृत एआई परियोजना में मराठवाड़ा क्षेत्र के किसानों को गुणवत्तापूर्ण एआई सेवाएं देने के लिए 273 कृत्रिम गर्भाधान (एआई) केंद्र स्थापित किए गए हैं. इन एआई केंद्रों ने अब तक पारंपरिक वीर्य का उपयोग करके लगभग 2 लाख एआई और लिंगीय वीर्य का उपयोग करके 12,024 एआई किए हैं. इन एआई ने अब तक क्षेत्र में 20,979 आनुवंशिक रूप से बेहतर बछड़ों को जोड़ा है. नांदेड़ जिले के 247 गांव शामिल हैं और अभी 1673 किसान दूध की आपूर्ति कर रहे हैं. दूध कलेक्ट करने के बुनियादी ढांचे में 187 दूध पूलिंग पॉइंट, 15 बल्क मिल्क कूलर और 1 मिल्क चिलिंग सेंटर शामिल हैं.

    II. महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में डेयरी को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान “दुधारू पशुओं की आपूर्ति” को लागू कर रही है. केंद्र से चल रहीं योजना में महाराष्ट्र राज्य सरकार के साथ मिलकर मंत्रालय से कई पशु रोगों का टीकाकरण किया गया है. राष्ट्रीय पशुधन मिशन-उद्यमी विकास योजना (एनएलएम-ईडीपी) के तहत, मराठवाड़ा क्षेत्र में साइलेज निर्माण इकाइयों की 8 प्रोजेक्ट की स्वीकृत की गई हैं, जिनकी कुल प्रोजेक्ट लागत 682.19 लाख रुपये है और सब्सिडी 320.47 लाख है.

    राज्य योजनाओं में पशुओं को हरा चारा देने के लिए किसानों को 100 प्रतिशत सब्सिडी के आधार पर चारा फसलों की उन्नत किस्मों के बीज वितरित किए गए हैं. इसके अलावा, मराठवाड़ा क्षेत्र में चारे की खेती को बढ़ावा देने के लिए 19 मार्च 2023 को एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना ‘10K FPO का गठन और संवर्धन’ के तहत कृषि विज्ञान केंद्र, लातूर को CBBO और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) को सहायक एजेंसी के रूप में रजिस्टर किया गया. FPO लातूर जिला से चल रहा है और यह अपने सदस्यों को पशु चारा का व्यापार करता है. इस चारा उत्पादक कंपनी ने अब तक 300 किसानों को अपने शेयरधारकों के रूप में शामिल किया है और बिजनेस चलाया है.

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