Home पोल्ट्री Poultry: साल में एक व्यक्ति को कितना खाना चाहिए अंडा और मुर्गी का मीट, जानें यहां
पोल्ट्री

Poultry: साल में एक व्यक्ति को कितना खाना चाहिए अंडा और मुर्गी का मीट, जानें यहां

Live Stock News
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. भारत में ब्रायलर उद्योग का इतिहास की बात की जाए तो मुलायम मांस के साथ 60 दिन पुराने ब्रायलर पक्षी 1975 के बाद अलग इकाई के रूप में आने लगे थे. शुरू में हाइब्रिड ब्रॉयलर को जन्म देने वाले पक्षियों को आयात किया जाता था. प्रजनन कार्य दिल्ली में शुरू हुआ और बाद में दक्षिण भारत में स्थानांतरित हो गया. जेनेटिक्स, पोषण, ब्रीडर मैनेजमेंट, हैघरी मैनेजमेंट, हाउसिंग एंड डिजीज मैनेजमेंट के क्षेत्र में ब्रॉइलर उत्पादन जबरदस्त तकनीकी कार्य किया गया है. इसके बाद ब्रॉयलर के बढ़ने की अवधि 60 दिनों से धीरे-धीरे 40 दिनों तक कम हो गई है.

भारत में वार्षिक प्रति व्यक्ति खपत केवल 42 अंडे और 1.6 किलोग्राम मुर्गी के मांस की है, जो पोषण सलाहकार समिति द्वारा 180 अंडे और 11 किलो मुर्गी के मांस के अनुशंसित स्तर से कम है. मटन की ज्यादा कीमतें, गौमांस और सूअर के मांस पर धार्मिक प्रतिबंध, और तटीय क्षेत्रों के बाहर मछली की सीमित उपलब्धता ने चिकन को भारत में सबसे पसंदीदा और सबसे अधिक खपत मांस बनाने में मदद की है. घरेलू उत्पादन के विस्तार और बढ़ते एकीकरण ने पोल्ट्री अर्थात मुर्गी के मांस की कीमतों को कम किया है और इसकी खपत को बढ़ाया है.

भारतीय ब्रायलर उद्योग
भारतीय पोल्ट्री उद्योग भारत में सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक है. भारत में ब्रायलर का उत्पादन 8-10 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा है. भारत ब्रायलर का अठारहवीं सबसे बड़ा उत्पादक है. यह उद्योग मुख्य रूप से निजी उद्यमों की पहलों, कम से कम सरकारी हस्तक्षेप, पर्याप्त स्वदेशी पोल्ट्री आनुवंशिक क्षमताओं, आवश्यक पशु चिकित्सा स्वास्थ्य, पोल्ट्री आहार, उपकरण और पोल्ट्री प्रसंस्करण क्षेत्रों से समर्थन के कारण विकसित हुआ है.

36 दिन में हो जाता है 2 किलो तैयार
ऑल-इन-ऑल आउट रियरिंग सिस्टम उत्कृष्ट प्रणाली और 2 किलो ब्रायलर को 36 दिनों में बनाया जाता है. जिसमें 1.5 किलोग्राम आहार प्रति किलो चिकन होता है और जिसमें ग्रामीण किसानों द्वारा बनाए गए कम लागत वाले खुले घरों पर 3 प्रतिशत से कम मृत्यु दर हासिल कर ली गयी है. कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग या इंटीग्रेशन वाणिज्यिक ब्रायलर उद्योग के लिए एक प्रमुख भूमिका निभाती है.

ब्रायलर उद्योग के लिए इंटीग्रेशन
कई प्रकार की अर्थव्यवस्थाएं अन्य देशों में एकीकृत पोल्ट्री उत्पादन का आधार हैं. जिसने भारत में भी अपनी पकड़ बनाना आरम्भ कर दिया है. भारत के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में, बड़े पैमाने पर वर्टिकल एकीकरण पकड़ बना रहा है और खास तौर पर ब्रॉयलर उत्पादन में इस प्रणाली के अंतर्गत इंटीग्रेटर संपूर्ण वैल्यू चेन में निवेश करता है.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

Backyard poultry farm: know which chicken is reared in this farm, livestockanimalnews
पोल्ट्री

Poultry Farming: फीड खिलाने में बरते सावधानी, आलू भी मुर्गियों को पहुंचा सकता है नुकसान

नई दिल्ली. आमतौर पर एक पोल्ट्री फार्मर ये चाहता है कि पोल्ट्री...

Poultry farming: Not only airborne infections, but also water can spread disease in chickens, Livestocknews.com
पोल्ट्री

Poultry: गर्मी में मुर्गियों को दिन में फीड खिलाने से बचें, ज्यादा पानी पिलाएं

नई दिल्ली. गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है. ऐसे में मुर्गे और...

bird flu, poultry, livestock animal news
पोल्ट्री

Poultry Farming: गर्मी में मुर्गियां सीआरडी की हो जाती हैं शिकार, बचाव न करने पर होता है बड़ा नुकसान

नई दिल्ली. गर्मी के महीनों में मुर्गियों को बीमारियां बहुत परेशनी करती...