नई दिल्ली. गर्मियों का मौसम शुरू होने वाला है. जिसका दुष्प्रभाव पशुओं पर पड़ता है और उनके दूध उत्पादन पर भी इसका असर होता है. कई बार पशु बीमार पड़ जाते हैं. गर्मी में पशुओं को आने वाली विपरीत परिस्थितियों से किस तरह बचाया जाए, इस बारे में पशुपालकों को जानना बेहद जरूरी होता है. यदि उन्हें पशुओं का ख्याल गर्मी में किस तरह किया जाए, इसकी जानकारी नहीं होगी तो इसका खामियाजा उन्हें उठाना पड़ेगा. क्योंकि एक्सपर्ट कहते हैं कि गर्मियों में अगर पशु की देखभाल सही तरह से न की जाए तो उसके उत्पादन पर बहुत फर्क आता है.
पशु चिकित्सा अधिकारी, विकास विभाग दिल्ली सरकार डॉ. केशव कुमार शर्मा का कहना है कि जैसे मौसम बदलता है. अगर हम पशुओं की देखभाल नहीं करते हैं तो इसका दुष्प्रभाव पशुओं के स्वस्थ, दूध उत्पादन, प्रेगनेंसी पड़ता है. जो उत्पाद देने वाले पशु हैं, 40 डिग्री टेंपरेचर तक तो मामला संभल जाता है लेकिन उसके ऊपर जाते ही उसके दुष्प्रभाव सामने आने लगते हैं. डिहाइड्रेशन होना लगता है. उनकी रूटीन एक्टिविटी प्रभावित होती है. उनके खान.पान पर असर पड़ता है. पाचन क्रिया पर भी असर होता है. ऐसे समय पर उसका चलना फिरना भी कम हो जाता है.
हीट स्ट्रेस क्या है: गर्मी आने के साथ.साथ तापमान वृद्धि होने लगती है. राजस्थान जैसे राज्य में तो हालात और खराब हो जाते हैं. इसलिए पशुपालकों को कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए. गर्मियों के मौसम में पशुओं के खाने की मात्रा में 10 से 30 प्रतिशत की कमी आने लगती है. गर्मी के मौसम में पशुओं के रखरखावों का खासतौर पर ध्यान देना चाहिए. गर्मियों के मौसम में ही स्ट्रेस हो जाता है. हीट स्ट्रेस आने की वजह से पशुओं की उत्पादन क्षमता में 10ः तक कमी आ जाती है. इसलिए गर्मियों के मौसम में पानी की उपलब्धता बनाए रखना जरूरी होता है.
दूध उत्पादन अच्छा होगा: पशुओं के शरीर में पानी की मात्रा बनी रहे और बीमारियों के शिकार न हों इसके लिए दिन के समय तेज धूप में पशुओं को बाहर नहीं ले जाना चाहिए. क्योंकि इससे उनकी क्षमता पर प्रभाव पड़ता है. इसके अलावा गर्मी के मौसम में पशु के खान.पान का भी खास ख्याल रखना चाहिए. समय.समय पर पशु शाला की साफ सफाई भी करनी चाहिए. पशुशाला को वायु के आगमन के साथ.साथ अच्छे तरीके से साफ रखना जरूरी है. कई बार वायु का आगमन कम होने पर पशु गर्मी महसूस कर सकते हैं. यदि इन बातों का ध्यान रखा जाए तो न सिर्फ पशुपालक पशुओं के स्वास्थ्य को बनाए रख सकेंगे, बल्कि दूध उत्पादन भी अच्छा ले सकेंगे
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