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Dairy: देश के पहले गोबर गैस प्लांट में कितना होता है उत्पादन, इससे कैसे बढ़ रही किसानों की आय

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अफसरों के निरीक्षण की तस्वीर.

नई दिल्ली. पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में देश के पहले गोबर गैस प्लांट में 3300 किलो प्राकृतिक गैस सीएनजी गैस का उत्पादन होता है. गैस के साथ-साथ तरल और ठोस जैविक खाद का भी उत्पादन यहां किया जाता है. प्लांट का निर्माण करने वाली संस्था विक्रमादित्य ने 30 करोड़ की लागत से करीब 5 एकड़ में फैले 3300 किलो गैस उत्पादन क्षमता वाले प्लांट का निर्माण किया था. प्रतिदिन जैविक खाद का भी यहां से उत्पादन किया जाता है. जिसमें 55 हजार लीटर तरल खाद और 18 हजार ठोस जैविक खाद का उत्पादन होता है. वहीं प्रतिदिन 900 क्विंटल गोबर के साथ कंप्रेस्ड की जरूरत होती है.

अफसरों ने किया निरीक्षण
सचिव (एएचडी) अलका उपाध्याय, डीएएचडी वर्षा जोशी, अतिरिक्त सचिव (सीडीडी), डीएएचडी एमडी-पीसीडीएफ के साथ दुग्ध महासंघों और यूनियनों के प्रतिनिधियों ने वाराणसी में एनडीडीबी के अत्याधुनिक 100 एमटीपीडी गोबरगैस संयंत्र का दौरा किया. इस दौरान डॉ. शाहमीनेश संचालन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह मवेशियों के गोबर से संचालित देश के सबसे बड़े बायोगैस संयंत्रों में से एक है, जो न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम कर रहा है, बल्कि वाराणसी डेयरी प्लांट की तापीय और विद्युत ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करते हुए किसानों को अतिरिक्त आय भी प्रदान कर रहा है.

इन जरूरतों को किया जा रहा है पूरा
बताते चलें कि भारतीय मानकों के अनुसार गोबर गैस प्लांट में तैयार गैस को मान्यता मिल चुकी है. गेल, इंडिया आयल जैसी कंपनियों से करार के बाद गैस का घरेलू इस्तेमाल के साथ वाहनों में प्रयोग किया जा सकेगा. बता दें कि बायोगैस को गोबर गैस के नाम से भी जाना जाता है. यह जानवरों और पौधों से कार्बनिक कचरे की अवायवीय अपघटन के माध्यम से उत्पन्न होती है. या मुख्य रूप से मेथेन और कार्बन डाई ऑक्साइड का मिश्रण है और मीथेन बायो गैस का एक प्रमुख घटक है.

कैसे बनती है यहां गैस
गोबर गैस प्लांट अक्सर उन जगहों पर लगाया जाता है जहां पर अधिक मात्रा में गाय और भैंस होती है. क्योंकि इन प्लांट में गाय और भैंस के गोबर का भारी मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है. उनके द्वारा जो गैस निकलती है, इसका इस्तेमाल भी खाना ही पकाने के लिए तथा अन्य कामों के लिए किया जाता है. गोबर से औसतन 40 लीटर किलो गैस का उत्पादन होता किया जाता है. 3 घन मीटर बायोगैस उत्पादन के लिए 75 किगलोग्राम गोबर की जरूरत होती है. जिसके लिए कम से कम चार जानवरों की जरूरत पड़ती है.

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