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Milk Production: डेयरी फार्म बनाने में इन जरूरी बातों का रखें ख्याल तो पशु दूध से भर देगा बाल्टी

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प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली. गर्मी, सर्दी एवं और बारिश से बचाने एवं डेयरी पशुओं से अधिक उत्पादन हासिल करने के लिए आइडियल डेयरी फार्म व्यवस्था जरूरी है. देश में आमतौर पर खुला आवास एवं बन्द आवास का प्रचलन है. हालांकि पशु पालन की खुली आवास व्यवस्था बेहतर मानी जाती है. वयस्क गाय के लिए ढका हुआ, क्षेत्र 3.5 वर्ग मीटर तथा भैंस के लिए 4 वर्ग मीटर क्षेत्र होना चाहिए. पशु घर के खुले स्थान का क्षेत्र ढ़के हुए क्षेत्र से लगभग दो गुना अधिक रखा जाना चाहिए. चारे व दाने के लिए लम्बी नाद लगभग 60 से 75 से मीटर चौड़ी और 40 सेमी गहरी होनी चाहिए.

वहीं पीने के पानी के कुंड के चारों और पक्का लेकिन फिसलन रहित फर्श होना चाहिए जिसकी ढलान एक तरफ बने गढ्‌ढे की तरफ हो. आस-पास के क्षेत्रों की तुलना में आवास ऊंचे स्थान पर होना चाहिए. ताकि पानी एक जगह जमा न हो सके. वहीं पशु घर से गोबर व पेशाब का निकास भी आसानी से हो सके. इसकी व्यवस्था पशुशाला में हर हाल में की जानी चाहिए. एक्सपर्ट कहते हैं कि आवास में समुचित हवा व रोशनी का प्रबन्ध होना चाहिए. आवास की दिशा पूरब से पश्चिम की तरफ हो ताकि धूप उत्तरी भाग में तथा कम से कम धूप दक्षिणी भाग में पड़े.

बाहरी दीवार होनी चाहिए ऊंची
इसके अलावा आवास के बाहरी दीवार की ऊंचाई बनाई जानी चाहिए. कम से कम तीन मीटर तथा बीच के दीवार की 1.5 मीटर होना चाहिए. फर्श सीमेन्ट, कंक्रीट का पक्का बना होना बेहतर माना जाता है. हालांकि पशुओं को फिसलन से बचाने के लिए सतह खुरदरी हो तथा ढलानयुक्त बनाई जानी चाहिए. ताकि मल-मूत्र का निस्तारण हो सके. पशुघर की छत्त पक्की हो तो गर्मियो में उसपर घास-फूस पुवाल आदि डालकर (पानी का छिड़काव करना चाहिए खिड़की, दरवाजों, आदि पर टाट की बोरी टांगकर उस पर पानी छिड़कते रहना चाहिए.

सीलिंग फैन और कूलर की व्यवस्था बनाएं
पशुशाला की की गर्मियों में व्यवस्था की बात की जाए तो गर्मियों में यदि संभव हो तो सीलिंग फैन लगाएं. अगर चाहते हैं कि पशुओं को और ज्यादा आराम मिले तो कूलर भी लगवा सकते हैं. फार्म के हर प्रवेश बिन्दु पर पैर धोने की व्यवस्था होनी चाहिए. इससे बीमारियों के रोकथाम में सहायता मिलती है. पशु आवास वयस्क तथा कम उम्र के पशुओं के लिए अलग अलग होना चाहिए. देश के विभिन्न क्षेत्रों जैसे पहाड़ी, पठारी, मैदानी तथा निचले क्षेत्रों के लिए जलवायु के अनुरूप पशुओं की आवास व्यवस्था होनी चाहिए.

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