Home मीट Meat Production: किस तरह की होनी चाहिए मीट जैसे प्रोडक्ट की जांच, क्या है इसका तरीका
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Meat Production: किस तरह की होनी चाहिए मीट जैसे प्रोडक्ट की जांच, क्या है इसका तरीका

पैक मीट की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. खाद्य परीक्षण और अधिसूचित NABL की मानें तो भारत में फूड सेक्टर दिन ब दिन विकसित हो रहा है. हजारों खाद्य कंपनियां, निर्माता, रेस्तरेंट, प्रोसेसिंग कंपनियां, खाद्य गाड़ियां और क्लाउड किचन हैं जो भारत भर में तेजी से बढ़ती शहरी और अर्ध शहरी नगरों की मांग को पूरा कर रहे हैं. इसलिए यह बेहद ही जरूरी है कि फूड प्रोडक्शन प्रक्रिया को सख्त गुणवत्ता परीक्षणों से गुजरना जाए. ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जो उपभोक्ताओं को परोसा जा रहा है वो सभी मानकों को पूरा कर रहे हैं कि नहीं. चाहे वो मीट ही क्यों न हो.

बेहतर उत्पादन के लिए जरूरी है टेस्ट
खाद्य आपूर्ति की सुरक्षा उद्योग के हितधारकों, नियामक एजेंसियों और उपभोक्ताओं के लिए उच्च प्राथमिकता बनी रहती है.

ऐसे मामलों में, उद्योग के हितधारकों और नियामकों को सही वैज्ञानिक निर्णय लेने के लिए सटीक डेटा की आवश्यकता होती है.

इस डेटा के जरिए विश्लेषण किया जाता है. इसमें खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाएं इस पूरे प्रक्रिया में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.

परीक्षण किए गए खाद्य उत्पाद कृषि वस्तुओं से लेकर प्रोसेस्ड खाद्य उत्पादों तक हो सकते हैं, प्रोडक्शन से लेकर दुकान तक पहुंचते हैं.

परीक्षण कच्चे माल, उसकी प्रोसेसिंग और उत्पादन के दौरान उत्पाद, और साथ ही अंतिम उत्पादों पर किया जा सकता है.

खाद्य परीक्षण सुरक्षित, गुणवत्ता वाले उत्पादों के कुशल उत्पादन के लिए बेहद ही जरूरी होता है.

खाद्य उद्योग के बढ़ते निगरानी के चलते, खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुपालन सुनिश्चित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए परीक्षण करना आवश्यक है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट
एक्सपर्ट का कहना है कि खाद्य परीक्षण और अधिसूचित NABL के मुताबिक मीट की डिमांड भारत में बढ़ रही है. इस काम को धीरे—धीरे संगठित हाथों में दिया जा रहा है. इससे क्वालिटी वाला मीट लोगों को परोसा जा रहा है. खासतौर पर एक्सपोर्ट किया जा रहा है. ऐसे में गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए जांच बेहद ही जरूरी है.

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