नई दिल्ली. मीट का उत्पादन कई वजह से जरूरी है. एक्सपर्ट कहते हैं कि पोषण आर्थिक और सांस्कृतिक पहलू भी इसमें शामिल है. मीट प्रोटीन, आयरन विटामिन बी12 और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर सोर्स है, जो खास करके विकासशील देशों में विशेष रूप से जरूरी है. मीट का उत्पादन करने से न सिर्फ आम लोगों को पोषण से भरपूर फूड मिलता है, बल्कि इससे बेरोजगारी भी दूर होती है. हजारों लोगों को मीट उत्पादन से फायदा मिलता है. वहीं मीट उत्पादन से स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी योगदान मिलता है.
भारत से बफैलो मीट बड़ी मात्रा में अरब कंट्रीज में एक्सपोर्ट किया जाता है. कई अरब देशों में भारत का बफैलो मीट पसंद किया जाता है और इसकी अच्छी खासी डिमांड है. जिसकी वजह से इससे जुड़े लोगों को इसका फायदा मिलता है. हालांकि कुछ सुविधाओं को बेहतर करने की जरूरत है. ताकि इसे और ज्यादा फायदा लिया जा सके. आपको यह भी बताते चलें कि मोटे तौर पर भारत में बफैलो मीट और चिकन मीट के अलावा बकरे के मीट का सेवन ज्यादा किया जाता है.
स्लाउटर में हाउस में क्या-क्या सुविधा होनी चाहिए
एक्सपपर्ट कहते हैं कि नगरपालिकाओं को स्लाटर हाउस में बेहतर सुविधाएं बनाने के लिए कई काम करने की जरूत है. जैसे सड़कें, पीने के पानी की आपूर्ति, कम्पोस्टिंग, रेंडरिंग और वेस्ट निपटान. हर नगरपालिका में स्लाटर हाउस, ठोस और तरल वेस्ट मैनेजमेंट के लिए रेंडरिंग/कम्पोस्टिंग और वेस्ट को उचारित करने के लिए प्लांट होना चाहिए. हर स्लाटर हाउस में एक अपशिष्ट प्रबंधन योजना होनी चाहिए जो ठोस और तरल अपशिष्ट के संग्रह, उपचार और निपटान की प्रक्रियाओं को निर्धारित करती है. लैरिजों से ठोस अपशिष्ट, जैसे कि बचा हुआ खाद्य और चारा सामग्री और गंदगी और मल पदार्थ और वध हॉल से पेट की खाद के रूप में, को कम्पोस्टिंग और वर्मी-कम्पोस्टिंग का उपयोग करके निपटाया जाना चाहिए. यह काम स्थानीय निकायों द्वारा किया जाना चाहिए.
खास किस्म का वैन होना चाहिए
सॉलिड कचरा जैसे मृत जानवरों, शवों और मांस, आंतरिक अंग, स्लाटर हाउस से बिन-खाने योग्य उप-उत्पादों और मुर्गी स्टालों से कचरे से आता है. इस ठोस कचरे की धारा के व्यवस्थित संग्रह के लिए जरूरी प्रणाली की जरूरत है और इनकी प्रोसेसिंग स्थानीय निकायों द्वारा उचित आकार के सूखे रेंडरिंग प्लांट में किया जाना चाहिए. मुर्गी स्टालों के संदर्भ में, ठोस कचरे को दैनिक रूप से इकट्ठा करने के लिए एक उचित डिजाइन किया गया चार या तीन पहिया वैन का उपयोग किया जाना चाहिए. वैन की संचालन लागत को मुर्गी स्टालों से मासिक शुल्क लेकर वसूल किया जा सकता है.
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