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Milk Production: मध्य प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए 2.50 हजार करोड़ खर्च करेगी सरकार

हरित प्रदेश मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन सदस्यों को बोनस का तोहफा दिया जा रहा है.
प्रतीकात्मक फोटो. livestock animal news

नई दिल्ली. मध्य प्रदेश देश का मिल्क कैपिटेल बनने की तैयारी में है. देश के कुल दूध उत्पादन में प्रदेश की भागीदारी 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 फीसदी की तैयारी की जा रही है. अभी प्रदेश में दूध उत्पादन 21.32 मिलियन टन है. यह देश के कुल दूध उत्पादन का 8.91 प्रतिशत है. अब बन रही कार्ययोजना के तहत 25.58 मिलियन टन दूध का उत्पादन किया जाएगा. इससे प्रति व्यक्ति दूध उत्पादन की उपलब्धता में इजाफा होने की भी संभावना है. सरकार इसके लिये करीब ढाई हजार करोड़ रूपये खर्च करने की तैयारी में है.

इस दौरान पशुपालन प्रोत्साहन पर विशेष जोर दिया जाएगा. प्रदेश देश का तीसरा सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादन करने वाला प्रदेश है. देश में उत्पादित दूध में कुल 8.91 प्रतिशत योगदान है. उत्तर प्रदेश 16.21 प्रतिशत भागीदारी के साथ पहले नंबर पर है. 14.5 प्रतिशत साझीदारी करते हुए राजस्थान दूसरे स्थान पर है. आंकड़ों के मुताबिक यहां 10 हजार 86 हजार मिट्रिक टन दूध गाय का और 10 हजार 197 मिट्रिक टन दूध भैंस से प्राप्त होता है.

ये काम भी भी कर रही है मध्य प्रदेश सरकार
डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना में डेयरी स्थापना के लिए हितग्राहियों को दिया जा रहा अनुदान.

मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना के तहत मध्यप्रदेश स्टेट कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन का राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ अनुबंध किया गया है.

प्रदेश में संचालित लगभग 3 हजार गो-शालाओं में 4 लाख 75 हजार गौवंश का संरक्षण एवं पालन किया जा रहा है.

ग्रामीण क्षेत्र में मुख्यमंत्री गो-सेवा योजना के अंतर्गत 2203 गो-शालाएं निर्मित कर संचालित की जा रही हैं, जिनमें 2 लाख 11 हजार गो-वंश का व्यवस्थापन किया जा रहा है.

स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना के लिए नई नीति बनाई गई है. जिसके अंतर्गत आधुनिक पद्धति से गो-शालाओं का संचालन किया जाएगा. जैविक खाद, पंचगव्य एवं बायोगैस का उत्पादन बढ़ाया जाएगा.

पशुओं के संवर्धन के लिए है योजना
दूध उत्पादन के क्षेत्र में बढ़ोत्तरी के लिये सरकार द्वारा इस वर्ष 2.50 हजार करोड़ खर्च का प्रावधान किया है.

इसमें गो संवर्धन एवं पशुओं का संवर्धन योजना के लिए 620 करोड़ 50 लाख रुपये एवं मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना के लिए 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

इतना ही नहीं गो-शालाओं में गो-वंश के आहार आदि के लिए दी जाने वाली अनुदान राशि को 20 रुपये प्रति गो-वंश प्रतिदिन से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति गो-वंश प्रतिदिन कर दिया है.

Written by
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