नई दिल्ली. क्या आप भी बकरी पालन करते हैं अगर हां तो ये रिपोर्ट आपके लिए है. यदि आप छोट स्तर पर बकरी पालन कर रहे हैं तो मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से चलाई जा रही है योजना का फायदा लेकर बकरियों से बेहतर उत्पादन ले सकते हैं. असल में छोटे स्तर पर बकरी पालन करने वाले बकरी पालकों की ये शिकायत होती है कि उनके जानवर बेहतर उत्पादन नहीं कर पाते हैं. इसलिए सरकार की तरफ से नस्ल सुधार के लिए योजना लाई गई है. जिसके तहत उन्नत नस्ल का एक बकरा बकरी पालक को दिया जाएगा, ताकि उत्पादन बेहतर मिल सके.
गौरतलब है कि राज्य में देसी नस्ल की बकरियों की कई ऐसी नस्लें हैं, जिनसे उत्पादन उतना अच्छा नहीं मिल पाता है. जिसको देखते हुए सरकार ने अनुदान के आधार पर नर बकरा प्रदाय योजना की शुरुआत की है. यदि आप भी चाहते हैं कि इस योजना का फायदा आपको भी मिले तो इसकी कुछ शर्तें हैं, आइए इस बारे में यहां जानते हैं.
75 फीसद मिलेगी सब्सिडी
अनुदान के आधार पर नर बकरा प्रदाय योजना का मुख्य उद्देश्य देसी स्थानीय बकरियों की नस्ल मे सुधार लाना है.
इस योजना में सभी वर्ग के बकरी पालक को उन्नत नस्ल का एक नर बकरा अनुदान के आधार पर देने का नियम है.
सरकार की तरफ से इस योजना को प्रदेश के सभी जिलों में शुरू किया गया है.
सभी वर्ग के बकरी पालक जिनके पास न्यूनतम 5 बकरियां हों, वो इस स्कीम का फायदा उठा सकते हैं.
योजना के तहत जमनापारी, बरबरी और सिरोही नस्ल का एक बकरा दिया जाएगा.
कुल खर्च 8300 रुपए बताया गया है. जिसमें बकरे का मूल्य 7500 रुपए, बीमा राशि 2.75 प्रतिशत एक वर्ष के लिए 206 रुपए का खर्च है.
वहीं मिनरल मिक्सचर पर 394 रुपए और प्रशिक्षण बुकलेट व मॉनिटरिंग कार्ड के लिए 200 रुपए का खर्च निर्धारित है.
अनुदान की बात करें तो सभी वर्ग के लिए 75 प्रतिशत सरकार की तरफ से दिया जाएगा. बकरी पालक को बाकी 25 प्रतिशत देना होगा.
चयन के लिए बकरी पालक का ग्राम सभा में अनुमोदन कराना होगा. ग्राम सभा से अनुमोदित हितग्राहियों का जनपद पंचायत की सभा में अनुमोदन.
जिला पंचायत के अनुमोदन के बाद जिला पंचायत की कृषि स्थाई समिति की बैठक में अनुमोदन प्राप्त करना होगा.
संबंधित जिले के निकटतम पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु औषधालय के प्रभारी और उपसंचालक पशु चिकित्सा से अतिरिक्त जानकारी ले सकते हैं.











