Home डेयरी NDDB के सहयोग से फिर शुरू होगा NHEC, 2015 में लग गया था ‘ताला’
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NDDB के सहयोग से फिर शुरू होगा NHEC, 2015 में लग गया था ‘ताला’

बैठक में अहम मसलों पर हुई चर्चा.

नई दिल्ली. गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह के निर्देश पर राष्ट्रीय स्तर की मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी, नेशनल हेवी इंजीनियरिंग कोऑपरेटिव लिमिटेड (NHEC), पुणे को फिर से शुरू करने के लिए एक अहम पहल की गई है. इसको लेकर एक विशेष आम सभा की बैठक बुलाई गई. जहां विस्तार से चर्चा हुई. बता दें कि सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार ने NHEC को फिर से शुरू करने की प्रक्रिया का नेतृत्व करने के लिए NDDB के कार्यकारी निदेशक (तकनीकी) श्री राजीव को इसका प्रशासक नियुक्त किया है.

सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर सदस्यों को संबोधित किया और अपने संबोधन में NHEC को फिर से शुरू करने के महत्व और भारत के सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने में इसके संभावित योगदान पर प्रकाश डाला.

डेयरी के लिए तैयार होगा जरूरी उपकरण
विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर सदस्यों को संबोधित करते हुए, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश सी. शाह ने NHEC के कामकाज को बहाल करने की वकालत की.

उन्होंने इसकी दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए योजनाबद्ध मुख्य पहलों और इसे फिर से शुरू करने के रोडमैप की रूपरेखा प्रस्तुत की.

NHEC के सदस्यों को संगठन को चीनी, डेयरी, बायोगैस, कृषि और संबंधित क्षेत्रों जैसे उद्योगों के लिए उन्नत उपकरण बनाने के लिए उत्कृष्टता केंद्र के रूप में फिर से स्थापित करने के उद्देश्य के बारे में भी जानकारी दी गई.

इस प्रयास में सहयोग के लिए, NDDB की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी IDMC लिमिटेड तकनीकी विशेषज्ञता, विनिर्माण क्षमताएं और आधुनिकीकरण में सहायता प्रदान करेगी.

NHEC के फिर से शुरू होने से सहकारी इकोसिस्टम के मजबूत होने, आयात पर निर्भरता कम होने और सहकारी-नेतृत्व वाले औद्योगिक विकास के माध्यम से ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न में योगदान मिलने की उम्मीद है.

आम सभा की बैठक में शामिल सदस्यों ने सर्वसम्मति से NDDB द्वारा NHEC को फिर से शुरू करने पर अपनी सहमति दी.

क्या है NHEC, जानें यहां
बताते चलें कि नेशनल हेवी इंजीनियरिंग कोऑपरेटिव लिमिटेड (NHEC) पुणे स्थित एक प्रतिष्ठित मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव संस्था है. सरकार की तरफ से इसे 1974 में स्थापित किया गया था. ताकि भारत और विदेशों (जैसे एशिया और अफ्रीका) में चीनी मिलों को स्थापित किया जाए. टर्नकी प्रोजेक्ट्स संभाला जाए और इसके लिए भारी मशीनरी (बॉयलर, डिस्टिलरी, कोजेनरेशन पावर प्लांट आदि) का निर्माण किया जाए. हालांकि एनएचईसी (NHEC) मुख्य रूप से गंभीर वित्तीय कुप्रबंधन और भारी कर्ज के कारण वर्ष 2015 के आसपास पूरी तरह से बंद हो गई थी.

Written by
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