नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल सरकार के स्पेशल सेक्रेटरी और वेस्ट बंगाल कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स फेडरेशन लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर, शेख अंसार अहमद ने NDDB, आनंद की अपनी यात्रा के दौरान NDDB के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह से मुलाकात की. इस मुलाकात का मकसद पश्चिम बंगाल में डेयरी सेक्टर को मजबूत करने के मौकों पर चर्चा करना था. इस दौरान NDDB के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीनियर अधिकारी भी मौजूद थे. बातचीत का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल में डेयरी की संभावनाओं का पूरा लाभ उठाने के लिए एक व्यापक डेयरी विकास योजना की जरूरत पर था.
चर्चा के मुख्य बिंदुओं में डेयरी कोऑपरेटिव सोसायटियों और मिल्क यूनियनों को मजबूत और पुनर्जीवित करना, दूध की खरीद बढ़ाना, मौजूदा प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर इस्तेमाल करना, ब्रीडिंग से जुड़ी कोशिशों के ज़रिए प्रोडक्टिविटी बढ़ाना और संस्थागत व मानव संसाधन क्षमताएं विकसित करना शामिल था.
डेयरी वैल्यू चेन भी की जाएगी मजबूत
इसके अलावा, असरदार ब्रांडिंग और मार्केटिंग के ज़रिए कोऑपरेटिव मार्केट में मज़बूत मौजूदगी और डेयरी वैल्यू चेन के डिजिटलाइजेशन के महत्व पर भी चर्चा की गई.
बैठक में पश्चिम बंगाल में तिलहन (ऑयलसीड्स) वैल्यू चेन के विकास पर भी बात हुई.
खासकर NDDB की हाल ही में शुरू की गई ‘पूर्वी क्षेत्र में खाद्य तेल वैल्यू चेन को मजबूत करने की पहल’ के संदर्भ में.
डॉ. शाह ने कोऑपरेटिव डेयरी के ज़रिए पश्चिम बंगाल में ग्रामीण आजीविका को बेहतर बनाने में राज्य सरकार का सहयोग करने के NDDB के संकल्प को दोहराया.
वहीं आनंद में NDDB के दौरे के दौरान, पश्चिम बंगाल सरकार के स्पेशल सेक्रेटरी शेख अंसार अहमद ने भारत के कोऑपरेटिव डेयरी इकोसिस्टम को दिखाने वाले कई संस्थानों और सुविधाओं का दौरा किया.
उन्होंने NDDB की अत्याधुनिक जीनोमिक्स और OPU-IVF लैबोरेटरी का दौरा किया, जहाँ उन्होंने एडवांस्ड ब्रीडिंग और जीनोमिक टेक्नोलॉजी के बारे में जानकारी ली.
साथ ही, उन्होंने सस्टेनेबल फ़ार्म मैनेजमेंट डेमोंस्ट्रेशन यूनिट भी देखी, जो रिसोर्स-एफिशिएंट और सर्कुलर डेयरी फर्मिंग को दिखाती है.
उन्होंने NDDB की पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी कंपनियों – NDDB CALF लिमिटेड और IDMC लिमिटेड – का भी दौरा किया और एडवांस्ड टेस्टिंग क्षमताओं तथा देसी डेयरी टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग के बारे में जाना.
मुजकुवा में, उन्होंने किसानों से बातचीत की और खाद प्रबंधन, चारे के विकास और डेयरी कोऑपरेटिव सोसाइटी (DCS) के कामकाज से जुड़ी पहलों को देखा, जो सस्टेनेबल और किसान-केंद्रित तरीकों को उजागर करती हैं.
इसके अलावा, उन्होंने GCMMF (अमूल) और नेशनल कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड का दौरा किया.
जहां उन्होंने कोऑपरेटिव दूध खरीद, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के साथ-साथ डेयरी कोऑपरेटिव आंदोलन को मजबूत करने के प्रयासों के बारे में जानकारी हासिल की.











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