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Milk Production: मिलावट नहीं, इस तरह से दूध में बढ़ाएं फैट और SNF, होगा खूब फायदा

दुधारू पशुओं के बयाने के संकेत में सामान्यतया गर्भनाल या जेर का निष्कासन ब्याने के तीन से 8 घंटे बाद हो जाता है.
गाय-भैंस की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. ग्राहकों के मन में यह सवाल अक्सर उठता होगा कि पशुपालक या दूध बेचने वाले लोग दूध में किस वजह से मिलावट करते हैं? आमतौर पर पशुपालक और डेयरी उद्योग के लोग दूध के अंदर मिलावट इसलिए करते हैं ताकि ज्यादा मुनाफा हो सकें. डेयरी उद्योग के अंदर जिस गाय या भैंस के दूध में फैट और एसएनएफ ज्यादा होता है उस गाय और भैंस का दूध अधिक दामों पर बेचा जा सकता है. मिलावट करने पर दूध गाढ़ा दिखने लगता है तो आम ग्राहक भी इसे ज्यादा दाम पर ले लेते हैं. क्योंकि पशुपालक और छोटे किसानों के पास आय का जरिया पशु के जरिए हासिल दूध ही होता है. इस वजह से मिलावट की जाती है.

एक्सपर्ट कहते हैं कि पशुपालक और डेयरी उद्योग से जुड़े लोग जब दूध में पाउडर वनस्पति तेल की आदि की मिलावट करते हैं तो इससे दूध तो गाढ़ा हो जाता है लेकिन इसके स्वाद और गुण दोनों ही तब्दील हो जाते हैं. जिसका पता आसानी से आम ग्राहक भी लगा लेते हैं. एक्सपर्ट का कहना है कि पाउडर मिलाने से एसएनएफ तो बढ़ जाता है लेकिन दूध के फैट में कोई इजाफा नहीं होता. इसलिए दूध में फैट और एसएनएफ बढ़ाने के लिए सही तरीकों को अपनाना बेहद जरूरी होता है.

बेहतर नस्ल के पशुओं को खरीदें
दूध में फैट और एसएनएफ बढ़ाने के लिए पशुपालक भाई ब्याने से पहले और ब्याने के बाद सही मात्रा में अगर पशुओं को हरा चारा और सूखा चारा देने लगें तो इससे फायदा होगा. इसके अलावा पशुओं की साफ सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए. पशुओं को रोग से बचाना बेहद जरूरी है. पशुपालक भाई अगर दूध की गुणवत्ता बेहतर चाहते हैं तो एक अच्छी नस्ल के पशु को खरीदना चाहिए. पशुपालक इस बात का खास ध्यान रखें कि अच्छी नस्ल में ही बेहतर दूध उत्पादन क्षमता होती है. इसलिए अगर डेयरी उद्योग के लिए गाय या भैंस खरीद रहें तो नस्ल का चुनाव सोच समझकर करना चाहिए.

पशु बीमार हो जात हैं
इन सभी बातों के अलावा पशुपालकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि पशु को अधिक इंजेक्शन न लगाएं. इंजेक्शन लगाने से पशुओं को कई नुकसान होता है. पशुओं को खराब खाद्य सामग्री न परोसें. ऐसा करने पर न सिर्फ पशु की दूध देने की क्षमता प्रभावित हो जाती है. बल्कि कई बार पशु के द्वारा दिया गया दूध भी दूषित हो जाता है. वहीं इंजेक्शन देने से कुछ वक्त के लिए पशु दूध तो ज्यादा देने लगते हैं लेकिन इसके दूरगामी परिणाम बहुत खराब होते हैं. पशु इससे कमजोर होने लगते हैं और बीमार पड़ जाते हैं.

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