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Padma Shri Award: आइसक्रीम बनाने वाले इस डेयरी कारोबारी को मिला पद्मश्री अवार्ड, यहां जानें इनके बारे में

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पद्मश्री अवार्ड पाने वाले हैटसन एग्रो कंपनी के चेयरमैन आरजी चंद्रमोगन.

नई दिल्ली. आइसक्रीम बनाने वाले डेयरी कारोबारी आरजी चंद्रमोगन को पद्मश्री अवार्ड मिला है. चंद्रमोगन हैटसन एग्रो कंपनी के चेयरमैन हैं. उन्हें ये सम्मान मिला है, इस बात का ऐलान होते ही डेयरी सेक्टर में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है, भारतीय डेयरी संघ ने उन्हें बधाई भी दी है. बता दें कि उन्हें ये सम्मान उनके दूरदर्शी नेतृत्व, अथक समर्पण और डेयरी उद्योग और कृषि क्षेत्र में परिवर्तनकारी योगदान के लिए दिया जा रहा है. उन्होंने देशभर में डेयरी किसानों को सशक्त बनाते हुए इनावेशन और स्थिरता को आगे बढ़ाया है. गौरतलब है कि इससे पहले उन्हें 50वें डेयरी उद्योग सम्मेलन के दौरान, लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है.

आरजी चंद्रमोगन की निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी डेयरी कंपनी हैटसन एग्रो प्रोडक्ट लिमिटेड ने देश का पहला और सबसे एडवांस टेक्नोलॉजी आधारित आइसक्रीम प्लांट स्थापित किया था. इसकी उत्पादन क्षमता प्रतिदिन दो लाख लीटर आइसक्रीम की है. यह प्लांट तेलंगाना के संगारेड्डी जिले की जहीराबाद तालुका के गोविंदपुर थांडा गांव में है. इसे लगाने में 600 करोड़ रुपए का खर्च आया है. हैटसन एग्रो प्रॉडक्ट का 31 मार्च 2024 को खत्म हुए वित्त वर्ष में राजस्व 7246.97 करोड़ रुपए था. इसके दो और आइसक्रीम प्लांट हैं. दोनों तमिलनाडु में हैं, एक सलेम जिले के करुमापुरम में और दूसरा चेन्नई के पास नल्लूर में है. बता दें कि उनकी क्षमता 90 हजार लीटर और 40 हजार लीटर रोजाना की है.

1970 में लगाई थी पहली फैक्ट्री
रूरल वर्ल्ड से बातचीत में हैटसन एग्रो के चेयरमैन आरजी चंद्रमोगन कहते हैं, “यह न सिर्फ हमारा सबसे बड़ा बल्कि तकनीकी रूप से सबसे एडवांस आइसक्रीम प्लांट है.” कुल 119 एकड़ के परिसर में यह प्लांट 20 एकड़ में फैला है. इस परिसर में 30 एकड़ में आम के बगीचे और 5 एकड़ में गन्ने के खेत के साथ काफी हरित क्षेत्र है. चंद्रमोगन कहते हैं, “हमारे सलेम प्लांट में रोजाना 70 हजार लीटर आइसक्रीम बनाने के लिए 900 कर्मचारी काम करते हैं, लेकिन इस प्लांट में प्रतिदिन दो लाख लीटर आइसक्रीम का उत्पादन होता है और कर्मचारियों की संख्या सिर्फ 500 है.” 74 साल के चंद्रमोगन ने 1970 में पहली फैक्ट्री लगाई थी. वह चेन्नई के रोयापुरम में 125 वर्ग फुट में थी. उसमें 5 लीटर का बैच फ्रीजर था, जिसमें एक दिन में सिर्फ 10 हजार आइस कैंडी बनाए जा सकते थे.

दूसरी सबसे बड़ी आइसक्रीम बनाने की है कंपनी
तेलंगाना के गोविंदपुर थांडा स्थित अपने प्लांट में हैटसन एग्रो के चेयरमैन आरजी चंद्रमोगन आज हैटसन एग्रो गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (अमूल) के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी आइसक्रीम बनाने वाली कंपनी है. यह अरुण नाम से आइसक्रीम बनाती है जो काफी लोकप्रिय है। इबाको नाम से एक प्रीमियम प्रोडक्ट भी है. इन ब्रांड की बिक्री दक्षिण भारत के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में होती है. इस प्लांट में दुनिया की नवीनतम तकनीक और मशीनों का इस्तेमाल किया गया है. यहां उत्पादन की लगभग सारी प्रक्रिया और यहां तक कि पैकिंग भी मशीनों और रोबोट के जरिए की जाती है. आइसक्रीम बॉक्स के कोल्ड स्टोर में पहुंचने से पहले उनको बास्केट में रखने के लिए ही कर्मचारी हाथ लगाते हैं. संयंत्र में आइसक्रीम उत्पादन करने वाली मशीनों को लंबे कनवेयर बेल्ट से जोड़ा किया गया है. इन्हें देखकर लगता है जैसे किसी बड़े स्टील प्लांट के फ्लोर के देख रहे हैं.

ऑटोमेटिक मोड पर होता है सारा काम
हैटसन एग्रो के प्लांट में कन्वेयर बेल्ट का इस्तेमाल होता है. मिल्क पाउडर और बटर से लेकर एनहाइड्रस फैट, कोकोआ, फ्लेवर, चीनी, इमल्सिफायर और स्टेबलाइजर- ये सब कच्चे माल कम तापमान पर स्टोर में रखे जाते हैं. यहां पाश्चराइजेशन, होमोजेनाइजेशन और एजिंग की प्रक्रिया पूरी तरह ऑटोमेटेड है. इसके बाद शून्य से 5 डिग्री कम तापमान पर आइसक्रीम बनाई जाती है. स्पीड की बात करें तो एक मशीन एक घंटे में पांच रुपये वाले 43 हजार पीस बनाती है. एक और मशीन भी है जिसकी गति 12 हजार कप की है. यह सारा काम ऑटोमेटिक होता है. आइसक्रीम बनने के बाद उसे फ्रीजिंग टनल में भेजा जाता है जहां उसके तापमान में कमी की जाती है. उसके बाद कन्वेयर बेल्ट के जरिए विभिन्न प्रोडक्ट कोल्ड स्टोर में जाते हैं.

हैटसन एग्रो के प्लांट में लगाई गई है इंपोटेड मशीनरी
चंद्रमोगन बताते हैं कि यह एक विश्व स्तरीय फैक्ट्री है. यहां जो नई टेक्नोलॉजी और मशीनरी का इस्तेमाल किया गया है वह भारत में और कहीं नहीं है. इस प्लांट में अनेक तरह के आइसक्रीम प्रोडक्ट बड़ी मात्रा में बनाए जा सकते हैं. इस प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 2 लाख लीटर आइसक्रीम बनाने की है. इस प्लांट के लिए मशीनरी डेनमार्क की ग्राम इक्विपमेंट से मंगाई गई है. कोन बेकिंग की मशीनरी जर्मनी की वॉल्टर की है. चंद्रमोगन का मानना है कि सरकार को आइसक्रीम को एलीट कंज्यूमर के बजाय आम लोगों के मिल्क प्रोडक्ट के तौर पर देखना चाहिए. दूध पर तो कोई वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) नहीं लगता, लेकिन मिल्क पाउडर पर पांच प्रतिशत, मिल्क फैट (घी, मक्खन इत्यादि) पर 12 फीसदी और आइसक्रीम पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है. इस तरह का कर ढांचा कृषि उपज के मूल्य संवर्धन के विचार के विपरीत है. आइसक्रीम बच्चों को दूध देने का एक बेहतर माध्यम बन सकता है. इस पर जीएसटी कम करके सरकार को इसे प्रमोट करना चाहिए.

Written by
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