नई दिल्ली. राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय डेयरी मेला और एग्री एक्सपो 2026 में एचएफ क्रॉस नस्ल की गायों की दूध प्रतियोगिता में झंझाड़ी के अनिल मैहला की गाय चन्नो 77.977 किलोग्राम दूध देकर चैंपियन बनी. जबकि, झज्जर के सुंदरेठी के अजय कुमार की मुर्रा भैंस बाणी ने 31.140 किलोग्राम दूध के रिकॉर्ड के साथ पहला स्थान पाया. इसके अलावा एचएफ क्रॉस नस्ल की 5 गायों ने इनाम जीते. इनकी अन्य 4 गायों ने 75 किलो दूध उत्पादन के साथ दूसरा और तीसरा स्थान पाया.
आपको बता दें कि कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने विजेता पशुओं को बैज लगाकर और उनके मालिकों को इनाम देकर सम्मानित किया और सभी से अपील किया कि पशुपालन के काम को अच्छी तरह से करें ताकि इसका फायदा सभी को मिल सके. जानकारी के लिए बता दें कि इस मिल्किंग प्रतियोगिता में कई और पशुओं ने जीत दर्ज की और उनके मालिकों को ईनाम देकर सम्मानित किया गया है.
जानें और कौन-कौन जीता
मुर्रा नस्ल की मिल्किंग कैटेगिरी में नरेंद्र सिंह ने पहला पुरस्कार पाया, जबकि दूसरे स्थान पर भी नरेंद्र सिंह रहे और तीसरे स्थान पर मनीष रहे.
वहीं साहीवाल नस्ल की ब्यूटी मिल्किंग प्रतियोगिता में राजबीर ने पहला व दूसरा और जयप्रकाश ने तीसरा पुरस्कार हासिल किया.
एचएफ क्रॉस को छोड़कर अन्य नस्लों की मिल्किंग कैटेगिरी में कुचपुरा के रमेश चंद की गाय ने पहला स्थान हासिल किया.
जबकि संडीर के प्रीत की गाय दूसरे व दादूपुर के राजबीर सिंह की गाय तीसरे स्थान पर रही.
हरियाणा नस्ल की ब्यूटी मिल्किंग प्रतियोगिता में संजीत मोर की गाय ने पहला, संजीत मलिक की गाय ने दूसरा और सुनील कुमार की गाय ने तीसरा स्थान हासिल किया.
तीन दिवसीय मेले में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड आदि राज्यों से किसानों, पशुपालकों एवं पशु प्रेमियों ने हिस्सा लिया.
वहीं थारपारकर नस्ल की गाय की ब्यूटी मिल्किंग प्रतियोगिता में संदीप नरवाल की गाय ने पहला और रामभगत की गाय ने दूसरा स्थान पाया.
पनीर बनाने की प्रतियोगिता में घोगड़ीपुर की राजबाला ने पहला और बबीता गांव पधाना ने दूसरा और रानी काछवा ने तीसरा इनाम मिला.
निष्कर्ष
एनडीआरआई के डायरेक्टर डॉ. धीर सिंह ने बताया कि एनडीआरआई 100 से अधिक वर्षों से नवोन्मेषी तकनीकों का इस्तेमाल कर दूध उत्पादन, पोषण, रोग निवारण एवं उत्पादकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. इसका फायदा पशुपालकों को मिल रहा है जबकि देश में लगातार दूध उत्पादन बढ़ रहा है.












