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Pashu Mela: PDFA एक्सपो में आने वाले पशुओं का होगा डोप टेस्ट

भैंसों के लगातार हाई एंबेंट के तापमान के संपर्क में रहने से उनकी शारीरिक प्रतिक्रिया बढ़ जाती है. यदि उन्हें आरामदायक आश्रय, चहारदीवारी या शॉवर उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो भैंस खाना खाना कम कर देती हैं.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. पशु मेले में आयोजित होने वाले मिल्किंग कॉम्पीटीशन में पशुओं को इंजेक्शन लगाकर धांधली करके अब कोई भी जीत नहीं पाएगा. क्योंकि इसकी गुंजाइश पर पूरी तरह से ब्रेक लगाने का काम किया जा रहा है और इसकी तैयारी कर ली गई है. दरअसल, लुधियाना में एक बड़ा पशु मेला आयोजित होने जा रहा है. प्रोग्रेसिव डेयरी फार्मर संगठन (PDFA) की ओर से एक्सपो के नाम से इस मेले का आयोजन किया जाएगा. जहां कॉम्पीटीशन में जीतने वाली गाय—भैंस को इनाम के तौर पर ट्रैक्टर बुलेट जैसा बंपर इनाम दिया जाना है लेकिन इस कॉम्पीटीशन में उन्हीं पशुपालकों की गाय व भैंस हिस्सा ले सकेगी जो अपने पशु का डोप टेस्ट कराएंगे.

जानकारी निकल के सामने आ रही है कि इस डोप टेस्ट को गुरु अंगद देव वेटरनरी और एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी गड़वासु लुधियाना की टीम करेगी. गडवासु की टीम डोप टेस्ट के साथ-साथ सभी गाय व भैंस में बीमारियों की जांच भी करेगी. इसके बाद ही पशु को एक्सपो में एंट्री दी जाएगी. ताकि किसी भी तरह की धांधली न हो और हैल्दी पशु एक्सपो में एंट्री करे.

कैसे इंजेक्शन दिया जाता है
गौरतलब है कि प्रतियोगिता के दौरान या उससे पहले गाय भैंस को एक ऐसा इंजेक्शन दिया जाता है जो सिंथेटिक ग्रोथ हार्मोन का होता है.

इस इंजेक्शन को देने की वजह से जो गाय-भैंस 20 लीटर दूध दे रही है वो सीधे तौर पर 30 से 35 लीटर तक दूध का उत्पादन करने लगती है.

बताया जा रहा है कि इनाम जीतने की लालच में कई पशुपालक ऐसा करते हैं. जबकि भारत में इस तरह की वैक्सीन लगाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है.

यही वजह है कि पीडीएफ की ओर से इस तरह का फैसला लिया गया है कि गाय और भैंस का पहले डोप टेस्ट किया जाएगा. उसके बाद ही पशु मेले में एंट्री दी जाएगी.

बता दें कि पशुओं की जांच का काम भी शुरू हो चुका है. डोप टेस्ट की तरह ही लैब में उनके ब्लड और मिल्क की जांच की जाती है. गड़वासु यूनिवर्सिटी की बायोटेक्नोलॉजी डिपार्मेंट की टीम इसकी जांच कर रहा है.

असल में एक्सपो में यूरोप का डेलिगेशन भी आ रहा है. साथ ही पड़ोसी देशों से भी पशुपालक हिस्सा ले रहे हैं.

एक्सपर्ट का कहना है कि अमेरिका, कनाडा, ब्राजील और पाकिस्तान में ज्यादा दूध लेने के लिए वैक्सीन का इस्तेमाल किया जाता है. जबकि भारत में इसकी मंजूरी नहीं है.

निष्कर्ष
हालांकि बहुत से पशुपालक चोरी छिपे इस वैक्सीन को लगाते हैं लेकिन प्रतियोगिता में इस पर पूरी तरह से पाबंदी होगी और इसकी जांच की जाएगी. टेस्ट की वजह से धांधली करके ​कोई भी प्रतियोगिता नहीं जीत पाएगा.

Written by
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