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Fisheries Sector: फिशरीज सेक्टर में एफएफपीओ के लिए सरकार ने दिए 544 करोड़ रुपए

The States and UTs have been advised to implement the clusters based approach for development of fisheries and aquaculture. Based on the request received from the Andaman and Nicobar Administration, development of Tuna fisheries cluster in Andaman & Nicobar Islands has been notified under PMMSY.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत मछुआरों और मछली पालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनकी सौदेबाजी की शक्ति बढ़ाने के लिए मत्स्य पालक उत्पादक संगठनों (FFPO) की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग ने पिछले पांच वर्षों (वित्त वर्ष 2020-21 से वित्त वर्ष 2024-25) के दौरान कर्नाटक में 64 एफएफपीओ सहित देश भर में कुल 1990 एफएफपीओ के गठन के लिए 544.86 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है.

इस परियोजना का कार्यान्वयन राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (एनएफडीबी), लघु किसान कृषि-व्यापार संघ (एसएफएसी), राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (एनएएफईडी) और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) जैसी केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से किया जाता है. अब तक कर्नाटक में 64 एफएफपीओ सहित देश भर में कुल 1990 मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) का गठन हो चुका है. पीएमएमएसवाई के तहत देश में गठित मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (एफएफपीओ) का राज्यवार विवरण अनुलग्नक-I में दिया गया है.

एक हजार करोड़ की योजनाओं को दी मंजूरी
मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग ने पिछले पांच वर्षों (2020-21 और 2024-25) और चालू वर्ष (2025-26) के दौरान पीएमएमएसवाई के तहत कर्नाटक सरकार को 1,078.12 करोड़ रुपये की विभिन्न मत्स्य विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 375.04 करोड़ रुपये है.

स्वीकृत प्रमुख गतिविधियों में तालाबों का निर्माण, पुनर्चक्रण मत्स्य पालन प्रणाली (आरएएस), मछली/झींगा हैचरी, मछली पालन की पिंजरा संस्कृति, बर्फ प्लांट, मछली परिवहन सुविधाएं, सजावटी मत्स्य पालन इकाइयां, मत्स्य सेवा केंद्र, समुद्री शैवाल संवर्धन राफ्ट आदि शामिल हैं.

इसके अतिरिक्त, पीएमएमएसवाई के उद्यमिता मॉडल घटक के तहत दो परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है.

इऩमें 805 लाख रुपये की लागत से मछली व्यापार केंद्र की स्थापना और 500 लाख रुपये की लागत से मछली फीड आदि की व्यवस्था होगी.

इसी बजट से मछली तेल और मछली घुलनशील पेस्ट निर्माण इकाई का विस्तार और अतिरिक्त सुविधाओं का निर्माण शामिल है, जिसमें केंद्र का हिस्सा 1.25 करोड़ रुपये तक सीमित है.

आपको बता दें कि देशभर में कुल 1990 एफपीओ काम कर रहे हैं. जिसमें मध्य प्रदेश में 107, झारखंड में 28, उड़ीसा में 30, उत्तर प्रदेश से 75, महाराष्ट्र में 196, जम्मू कश्मीर में दो, हिमाचल प्रदेश में 18, लद्दाख में 1, छत्तीसगढ़ में 56, गुजरात में 95, दमन और दीप में 2, बिहार में 48 और मणिपुर में 148 संचालित हैं.

इसके अलावा मेघालय में 2, असम में 176, त्रिपुरा में 122, मिजोरम में 18, तेलंगाना में 245, आंध्र प्रदेश में 176, तमिलनाडु में 183, उत्तराखंड में 32, पश्चिम बंगाल में 41, केरल में 127, कर्नाटक में 16, हरियाणा में 2, राजस्थान में 10, नागालैंड में 43, गोवा में 3, पांडुचेरी में 1 और अरुणाचल प्रदेश में 2 संचालित हैं.

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