नई दिल्ली. पोल्ट्री सेक्टर में बिहार अब नई उंचाइयां छूने जा रहा है. बिहार के गयाजी और समस्तीपुर में देश की सबसे बड़ी पोल्ट्री कंपनी एबीस अपना प्लांट लगाने जा रही है. इस समय छोटे किसानों के लिए दाने की बढ़ती कीमतें और चूजों की समय पर उपलब्धता बड़ी चुनौती है. ऐसे में पोल्ट्री प्लांट लगने के बाद ये दिक्कतें खत्म हो जाएंगी. इससे प्रदेश के पोल्ट्री फार्म संचालकों को भी सस्ते दाने उपलब्ध हो सकेंगे. प्लांट लगने से बिहार न केवल मांस बल्कि अंडा व्यवसाय को लेकर भी आत्मनिर्भर बन सकेगा. इस पहल से बिहार आने वाले समय में पूर्वी भारत का पोल्ट्री हब के रूप में देखा जाएगा.
एबीस कंपनी के बिहार में प्लांट लगाने को लेकर विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक बैठक पहले हो चुकी है. अब इस संबंध में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग उद्योग विभाग के सचिव के साथ एक और बैठक की जानी है जो जल्द ही होगी. बैठक में तय होगा कि प्लांट कहां लगेगा, जमीन कैसे दी जाएगी, कितना इनवेस्टमेंट होगा आदि. उद्योग नीति के अनुसार प्लांट लगाया जाना है. फिलहाल कंपनी गयाजी और समस्तीपुर में प्लांट लगाने को लेकर सहमति जता चुकी है.
क्या है बाय बैंक मॉडल
बाय-बैक मॉडल से मतलब उत्पाद की सुनिश्चित खरीद से है. कंपनियां पहले से ही फसल या पशु उत्पादों की कीमतें तय कर लेती हैं.
इससे बाजार में उतार-चढ़ाव का खतरा कम हो जाता है. बाजार में कीमतें बढ़ने का असर पशु उत्पादों यानी चारा आदि पर नहीं पड़ेगा.
बिहार में हर महीने लगभग 1.5 लाख से 2 लाख टन पोल्ट्री फीड की खपत होती है. मुजफ्फरपुर का बेला औद्योगिक क्षेत्र वर्तमान में पोल्ट्री फीड का बड़ा केंद्र है.
यहां लगभग 35 इकाइयां प्रतिमाह 30 हजार से 40 हजार टन दाने का उत्पादन कर रही हैं.
बिहार में फिशरीज के बाद पशुपालन सबसे तेजी से बढ़ता सेक्टर है. यहां मुर्गी पालन की अपार संभावनाएं हैं.
इसको देखते पोल्ट्री के क्षेत्र में काम करने वाली देश की बड़ी कंपनी एबीस अपना प्लांट लगाने जा रही है.
नई उद्योग नीति के तहत प्रदेश में प्लांट लगाने की तैयारी है. जल्द ही उद्योग विभाग के साथ बैठक कर जमीन उपलब्ध कराने पर सहमति बना ली जाएगी.
पोल्ट्री संचालकों को मुर्गी के दाना सस्ता व आसानी से मिलेगा चूजे मिलने की चुनौती भी कम होगी.
हजारों लोगों को रोजगार मिल सकेगा प्रदेश के मक्का उत्पादक किसानों को सीधा बाजार मिलेगा.











