नई दिल्ली. पशुओं के लिए हरे चारी की समस्या कोई नई बात नहीं है. खास तौर पर ठंड के मौसम में और गर्मी में यह समस्या रहती है. बड़े स्तर पर पशुपालन करने वाले पशुपालक भाई हरे चारे को लेकर परेशान रहते हैं. बहुत से लोग साइलेज बनाकर इसकी कमी को पूरा करते हैं लेकिन आपके पास अगर जमीन है तो अफ्रीकन टाल मक्का की बुवाई करके गाय, भैंस बकरी और भेड़ यहां तक कि पोल्ट्री के लिए भी चारा ले सकते हैं. ये बेहतरीन चारा फसल है और ये पशुपालन के साथ ही मुर्गी पालन करने वालों के लिए अच्छा चारा स्रोत है.
एक्सपर्ट का कहना है कि ये एक पौष्टिक और उच्च प्रोटीन वाला हरा चारा उपलब्ध कराती है, जो दूध उत्पादन, पशुओं के स्वास्थ्य और यहां तक की नए जानवरों के वजन को बढ़ाने में भी मददगार है. बताया जाता है कि इसके रेशेदार तने व पत्तियां जानवरों को ऊर्जा देते हैं, जो उन्हें ठंड से बचाने में भी मददगार साबित होता है.
खिलाने के फायदे क्या हैं
इसके इस्तेमाल की बात की जाए तो आप इसे हरे चारे के तौर पर गाय, भैंस, बकरी और भेड़ को दे सकते हैं. ये पौष्टिक तत्वों से भरा है.
इतना ही नहीं साइलेज बनाने के लिए भी यह चारा इस्तेमाल किया जा सकता है. क्योंकि लंबे समय तक इसको संरक्षित रखा जा सकता है.
इस चारे के अंदर प्रोटीन की बात की जाए तो 11 से 13 और शुष्क पदार्थ 17 प्रतिशत से ज्यादा होता है. इससे जानवरों को ताकत मिलती है.
मुर्गियों के अंडे में प्रोटीन होता है. यदि आप उन्हें इसका फीड खिलाते हैं तो अंडों के उत्पादन में भी फायदा मिलेगा.
अच्छी बात ये है कि यह चारा फसल 60 से 70 दिन में कटाई योग्य हो जाती है और एक एकड़ में इससे आपको 12 से 16 टन तक उपज मिल जाती है.
निष्कर्ष
भारतीय मिट्टी बेहद ही अनुकूल होती है और इसकी बुवाई कर पूरे साल चारा ले सकते हैं यदि आप पशुपालन कर रहे हैं तो ये आपके लिए फायदेमंद चारा फसल है.










