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Poultry: अंडे-चिकन के लिए दूसरे राज्यों के भरोसे नहीं रहेगा उत्तराखंड, हर साल इतना होगा उत्पादन

अंडा और चिकन की बढ़ती मांग को दूर करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने प्रयास तेज किए हैं.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. सेहत के लिए अंडा और चिकन मीट फायदेमंद है. ऐसे में पूरे देश में इसकी मांग बढ़ती जा रही है. अब उत्तराखंड अंडा और चिकन के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता नहीं रहेगा. उत्तराखंड में हर साल करीब 15 लाख से अधिक अंडों और 395 लाख किलोग्राम चिकन मीट की मांग है. उत्तराखंड ने पोल्ट्री क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देकर अगले पांच साल में इनके माध्यम से 4500 व्यक्तियों के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे. इसके लिए नेट ने कुक्कुट विकास नीति-2025 को हरी झंडी दे दी है. पांच साल के लिए निर्धारित की गई इस नीति के तहत राज्य में अंडा उत्पादन की 35 और ब्रायलर फार्म को 19 इकाइयों को स्थापना का लक्ष्य रखा गया है. इससे राज्य में लगभग 85 करोड़ रुपये का निजी निवेश होगा. यही नहीं, निवेशकों को पर्वतीय क्षेत्र में 40 और मैदानी क्षेत्र में 30 प्रतिशत अनुदान भी दिया जाएगा. कुल अनुदान 29.09 करोड़ रुपये प्रस्तावित है.

हर वर्ष उत्तराखंड में चिकन और अंडों की मांग बढ़ती जा रही है. अंडा और चिकन की बढ़ती मांग को दूर करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने प्रयास तेज किए हैं. वर्ष 2023 में उत्तराखंड में हुए वैश्विक निवेशक सम्मेलन के दौरान कुछ निवेशकों ने यहां पोल्ट्री क्षेत्र में निवेश को इच्छा जताई थी.

15 लाख अंडों और 395 लाख किलोग्राम चिकन मीट की जरूरत: बात सामने आई कि राज्य में प्रतिवर्ष 15,444 लाख अंडों और 395 लाख किलोग्राम पोल्ट्री मीट की मांग है. इसे पूरा करने के लिए उत्तराखंड को अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है. इसको देखते हुए कुक्कुट विकास नीति का खाका खींचा गया. कैबिनेट की बैठक में उत्तराखंड कुक्कुट विकास नीति-2025 को दी स्वीकृति दी गई. ये नीति पांच वर्ष के लिए होगी.

अंडा व पोल्ट्री मीट के लिए अन्य राज्यों पर निर्भरता कम होगी: सचिव पशुपालन डॉक्टर बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि यह नीति पांच वर्ष के लिए होगी. इसके तहत पर्वतीय क्षेत्र में अंडा उत्पादन के लिए 18 कमशिंगल लेवर फार्म व 10 ब्रायलर फार्म और मैदानी क्षेत्र में 17 कमर्शियल लेयर फार्म व नी आयलर फार्म की स्थापना होगी. पर्वतीय क्षेत्र में अंडा व ब्रायलर फार्म इकाइयों की स्थापना के लिए क्रमश 48 व 56 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रति इकाई दी जाएगी. यह प्रति इकाई की लागत का 40 प्रतिशत होगी. मैदानी क्षेत्र में अंडा व ब्रायलर इकाइयों की स्थापना को 45 व 63 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी.

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