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poultry farming: इनक्यूबेटर पोल्ट्री फार्मिंग को यूपी सरकार ने क्यों दिए 100 करोड़, जानिए इसकी असली वजह

पोल्ट्री के बिजनेस में बीमारियां रोक लीं तो ये मुनाफे का सौदा होता है.
चूजों का प्रतीकात्मक फोटो: Livestockanimalnews

नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग का बाजार लगातार बढ़ता जा रही है। यही वजह है कि सरकारें भी अब इस ओर देख रही हैं. यही कारण है कि सोमवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा में पास हुए अनुपूरक बजट में योगी सरकार ने स्टार्टअप और इन्क्यूबेटर पोल्ट्री फार्म के लिए सौ करोड़ रुपये दिए हैं. इस पैसे को जारी करने से यूपी सरकार का मकसद मुर्गी पालन को बढ़ावा देना है. इन्क्यूबेटर पोल्ट्री फार्म मार्केट में ब्रॉयलर चिक्स यानी चूजे की मांग को पूरा करता है. यही चूजा आगे चलकर बढ़ा होकर चिकन की मांग को पूरा करता है. बता दें कि न्क्यूबेटर पोल्ट्री फार्म में पैरेंट बर्ड पाली जाती हैं. अंडे और ब्रॉयलर चिकन के लिए बनने वाले पोल्ट्री फार्म के मुकाबले इनक्यूबेटर फार्म महंगा होता है.

उत्तर प्रदेश विधानसभा में पास हुए अनुपूरक बजट में योगी सरकार ने स्टार्टअप और इन्क्यूबेटर पोल्ट्री फार्म के लिए सौ करोड़ रुपये दिए हैं. इस पैसे को जारी करने से यूपी सरकार का मकसद मुर्गी पालन को बढ़ावा देना है. इन्क्यूबेटर पोल्ट्री फार्म में पाली जाने वाली मुर्गियां के लिए अलग तरह से दाना तैयार किया जाता है. इन मुर्गियों के दाने में मिनरल्स ज्यादा होते हैं. इसलिए अन्य दाने से काफी महंगा पड़ता है. इस फार्म में बॉयोसिक्योंरिटी का खर्च भी अगल से बढ़ जाता है. इतना ही नहीं पैरेंट मुर्गियों के साथ रखे जाने वाले 10 फीसद मुर्गों को भी अलग से महंगा दाना खिलाया जाता है.

इनक्यूबेटर पोल्ट्री फार्म इस तरह से करता है काम
इन्क्यूबेटर पोल्ट्री फार्म पैरेंट बर्ड को पाला जाता है. इस श्रेणी में मुर्गा-मुर्गी दोनों ही शामिल हैं. इस फार्म में मुर्गी जो अंडे देती है, उसमें से चूजा निकाला जाता है. चूजा देने से पहले अंडे को मशीनों में रखा जाता है. इसके बाद 20-21 दिन में अंडे में से चूजा निकल आता है. इसमें खास बात ये है कि एक दिन का चूजा ही मार्केट में बेच दिया जाता है. यह वो अंडा होता है जो मुर्गी-मुर्गे से क्रॉस होने के बाद देती है. पैरेंट बर्ड के पोल्ट्रीं फार्म में मुर्गियों के हिसाब से 10 फीसद मुर्गे रखे जाते हैं.

पैरेंट बर्ड का चूजा आता है महंगा
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पैरेंट बर्ड के लिए 100 करोड़ रुपये की मदद करने को तैयार हुई है. पांच हजार से लेकर दस हजार पैरेट बर्ड वाला इनक्यूबेटर पोल्ट्री फार्म को काफी बड़ा फार्म माना जाता है. इस इनक्यूबेटर पोल्ट्री फार्म में जिस पैरेंट बर्ड की जरूरत होती है,उसके एक चूजे की मार्केट में रेट करीब 325 रुपये प्रति चूजा है. एक चूजा छह महीने पालने के बाद अंडा देना शुरू कर देता है.

मार्केट में हर वक्त डिमांड में पैरेंट बर्ड चूजा
मुर्गी पालकों की मानें तो मार्केट में इनक्यूबेटर पोल्ट्री फार्म में पाले जाने वाले पैरेंट बर्ड चूजा की बहुत डिमांड रहती है. यही वजह है कि मार्केट में ब्रॉयलर चिकन की मांग को पूरा करने के लिए तीन सौ करोड़ मुर्गे-मुर्गी की जरूरत होती है. इसमें तकनीकी पेंच ये भी बताया जाता है जब आप फार्म में 330 करोड़ चूजे पालेंगे तब जाकर आप 300 करोड़ मुर्गे-मुर्गी की मांग को पूरा कर सकेंगे. गौरतलब है कि भारत में स्काई लार्क और वैंकीस जैसी कंपनियां बड़ी तादाद चूजों की मांग को पूरी करती हैं. अंडे देने वाली लेअर बर्ड का एक चूजा 40 से 45 रुपये और ब्रॉयलर चिकन का चूजा 25 से 30 रुपये का बिक रहा है. ब्रॉयलर चूजा 25 से 30 दिन में खाने के लिए तैयार हो जाता है. इसलिए हर 30 दिन बाद ब्रॉयलर चूजे की जरूरत पड़ती है.

Written by
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