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Poultry: गर्मी में मुर्गियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता हो जाती है कमजोर, संक्रमण का रहता है खतरा

ranikhet disease
मुर्गी पालन की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग (Dairy Fisheries and Animal Resources Department) के एक्सपर्ट ने लाइव स्टॉक एनिमल न्यूज (Livestock Animal News) को बताया कि जून की भीषण गर्मी में मुर्गी पालकों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है. क्योंकि ये महीना मुर्गी पालन के लिए मुश्किलों भरा है. कई तरह की दिक्कतें मुर्गे-मुर्गियों को हो सकती है. नतीजे में पोल्ट्री फार्मिंग के काम में नुकसान उठाना पड़ सकता है. चाहे ब्रॉलयर फार्मिंग हो गया फिर लेयर फार्मिंग, दोनों ही काम में मुर्गी पालक को सतर्क रहना चाहिए.

बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की ओर कुछ अहम बातों की जानकारी दी गई है, जो एक मुर्गी पालक को पता होनी चाहिए. इससे वो अपने काम को नुकसान से बचा सकते हैं. आइए इस बारे में डिटेल से जानते हैं.

क्या उपाय करना है, यहां जानें
पोल्ट्री एक्सपर्ट का कहना है कि इस माह मुर्गियों में हीट स्ट्रोक का खतरा होता है.

हीट स्ट्रोक के प्रमुख लक्षणों में मुर्गियों का मुंह खोलकर तेजी से हांफना शामिल है.

वहीं पंखों को शरीर से दूर फैलाकर जमीन पर लेट जाना, अचानक पानी बहुत ज्यादा पीना और सुस्त हो जाना आदि है.

अगर बर्ड्स में ये लक्षण दिखें, तो तुरंत फॉगर्स चालू करें, वेंटिलेशन बढ़ाएं और पानी में ग्लूकोज या फिर इलेक्ट्रोलाइट दें.

फार्म के मुख्य दरवाजे पर पोटैशियम परमैंगनेट (लाल दवा) का छिड़काव करें.

ये जान लें कि इस माह मुर्गियों के शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है.

जून में दोपहर के समय पानी के पाइप और टैंक को सीधा धूप से बचाएं.

पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स या विटामिन-सी (Vitamin-C) जरूर मिलाएं ताकि बर्ड्स डिहाइड्रेशन से बचे रहें.

गर्मी में मुर्गियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.

संक्रमण से मुर्गियों को बचाने के लिए अपने फार्म में बायो सिक्योरिटी के नियमों का कड़ाई से पालन करें.

फुट-बाथ और दीवार पर डिसइन्फेक्टेंट का छिड़काव करें. फार्म के अन्दर बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश बंद करें.

जून के महीने में मुर्गियों में मृत्यु दर बढ़ने और अंडे और मांस के उत्पादन में कमी आने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है.

मुर्गियों के लिए 24 घंटे इलेक्ट्रोलाइट युक्त ताजा पानी उपलब्ध रखें.

शेड के अंदर वेंटिलेशन का बेहतर प्रबंध करें. केवल ठंडे समय (सुबह-शाम) में ही दाना खिलायें.

निष्कर्ष
ऐसा करने से पोल्ट्री फार्मिंग में आप खुद को नुकसान से बचा लेंगे. जिससे इस का में नुकसान नहीं होगा.

Written by
Livestock Animal News Team

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