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Government Scheme: आरजीएम के जरिए स्वदेशी नस्लों का विकास और संरक्षण कर रही है सरकार

सदैव स्वस्थ एवं सुडौल शरीर वाले पशु ही खरीदना चाहिए.
प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली. आपको बता दें कि देश दूध उत्पादन के मामले में दुनियाभर में नंबर पोजिशन पर है. जबकि हर साल दूध उत्पादन के मामले में भारत आगे चलता चला जा रहा है. हालांकि भारत का दूध उत्पादन ज्यादा इसलिए भी है कि क्योंकि यहां पशुओं की संख्या ज्यादा है. वहीं दूसरी ओर एक्सपर्ट का कहना है कि जितने ज्यादा पशु भारत हैं, अगर वो अच्छी क्षमता से दूध का उत्पादन करे तो फिर भारत कभी भी दूध उत्पादन में दूसरे स्थान पर भी नहीं आएगा. असल में भारत में प्रति पशु दूध उत्पादन क्षमता कम है.

इस बात को सरकार भी समझ रही है. इसलिए लगातार पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने पर काम किया जा रहा है. ये इसलिए भी जरूरी है कि भारत में दूध की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. आबादी के हिसाब से सभी को अच्छा दूध उपलब्ध कराना है तो फिर ये करना जरूरी है. इसको देखते हुए सरकार की तरफ से राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) को दिसंबर 2014 में शुरू किया गया था.

इसे प्रजनन ट्रैक्ट में चयनात्मक प्रजनन और नॉन-डिस्क्रिप्ट बोवाइन आबादी के आनुवंशिक उन्नयन के माध्यम से स्वदेशी नस्लों के विकास और संरक्षण के लिए 2025 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ शुरू किया गया है.

इस योजना में दो घटक शामिल हैं. एक है राष्ट्रीय बोवाइन प्रजनन कार्यक्रम (एनपीबीबी) और दूसरा है राष्ट्रीय बोवाइन उत्पादकता मिशन (एनएमबीपी).

आरजीएम का क्या है उद्देश्य

  1. स्वदेशी नस्लों का विकास और संरक्षण.
  2. स्वदेशी नस्लों के लिए नस्ल सुधार कार्यक्रम ताकि आनुवंशिक संरचना में सुधार हो और स्टॉक में वृद्धि हो.
  3. रोग मुक्त उच्च आनुवांशिक गुण वाली मादा आबादी को बढ़ाकर और रोगों के प्रसार को नियंत्रित करके बोवाइन आबादी के दुग्ध उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि करना.
  4. गिर, साहीवाल, राठी, देओनी, थारपरकर, लाल सिंधी जैसी उत्कृष्ट स्वदेशी नस्लों का उपयोग करके नॉन-डिस्क्रिप्ट गोपशुओं का उन्नयन करना.
  5. प्राकृतिक सेवा के लिए रोग मुक्त उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाले बैलों का वितरण.
  6. उच्च आनुवांशिक गुणवत्ता वाले जर्म प्लाज़्म का उपयोग करके एआई या प्राकृतिक सेवा के जरिए सभी प्रजनन योग्य मादाओं को संगठित प्रजनन के तहत लाना.
  7. किसानों के घर पर गुणवत्तापूर्ण कृत्रिम गर्भाधान (एआई) सेवाओं की व्यवस्था करना.
  8. प्रजनकों और किसानों को जोड़ने के लिए बोवाइन जर्मप्लाज्म के लिए ई-मार्केट पोर्टल बनाना.
  9. सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी (एसपीएस) मुद्दों को पूरा करके पशुधन और पशुधन उत्पादों के व्यापार में वृद्धि करना.
  10. जीनोमिक्स का प्रयोग करके कम उम्र के उच्च आनुवंशिक योग्यता वाले प्रजनन बैलों का चयन करना.

निष्कर्ष
सरकार का मनना है कि यदि इन दस प्वाइंट्स पर काम कर लिया जाए तो फिर प्रति पशु दूध उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जा सकता है.

Written by
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