Home पशुपालन Scheme: नस्ल सुधार के लिए सरकार की मदद से ले सकते हैं मुर्रा नस्ल का सांड
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Scheme: नस्ल सुधार के लिए सरकार की मदद से ले सकते हैं मुर्रा नस्ल का सांड

murrah buffalo livestock
प्रतीकात्मक फोटो:

नई दिल्ली. भैंसों की तमाम नस्ल में मुर्रा नस्ल ज्यादा दूध उत्पादन के लिए जानी जाती है. एक्सपर्ट कहते हैं कि एक सामान्य मुर्रा भैंस 80 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक में मिल जाती है. जबकि मुर्रा भैंस पहला बच्चा देने के बाद हर रोज 12 से 15 लीटर दूध देती है. इससे पशुपालक को अच्छी कमाई का मौका मिलता है. मुर्रा की ज्यादा दूध देने की खासियत की वजह से इसे भारत के अलावा चीन, श्रीलंका, मलेशि‍या, बांग्लादेश, बुल्गारिया, थाईलैंड, नेपाल, इंडोनेशि‍या, ब्राजील, म्यांमार और वियतनाम में भी पाला जाता है.

इसकी तमाम खासियतों को पहचानते हुए मध्य प्रदेश सरकार भी इस नस्ल को बढ़ावा देने का काम कर रही है. राज्य को मिल्क कैपिटल बनाने का सपना देखने वाली डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने एक योजना की शुरुआत की है. जिसके जरिए मुर्रा नस्ल को बढ़ावा और नस्ल सुधार का काम किया जा रहा है. इससे न सिर्फ राज्य में दूध उत्पादन तेजी से बढ़ेगा. बल्कि राज्य के डेयरी किसानों को इसका फायदा होगा, उनकी इनकम भी बढ़ जाएगी.

किसे मिलेगा सब्सिडी पर मुर्रा सांड
सरकार ने सभी वर्ग के लिए समुन्नत पशु प्रजनन योजना (अनुदान पर प्रजनन योग्य पेडीग्रिड मुर्रा सांड का प्रदाय) शुरू की है.

बताया गया है कि इस योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य नस्ल सुधार करना है.

इस योजना के तहत प्रगतिशील पशुपालक अथवा प्रशिक्षित गौ सेवक को पेडीग्रिड प्रजनन योग्य मुर्रा सांड प्रदाय किये जाते हैं.

योजना प्रदेश के सभी जिलों मे लागू की गई है.

योजना सभी वर्गों के लिए लागू है. सभी को इसका फायदा मिलेगा.

योजना इकाई की बात करें तो प्रजनन योग्य पेडीग्रिड मुर्रा सांड दिया जाएगा.

इकाई लागत 60 हजार रुपए तय की गई है.

परिवहन का खर्च दो हजार रुपए बीमा सहित है.

सभी वर्ग के लिए 75 प्रतिशत सब्सिडी निर्धारित है. बाकी 25 प्रतिशत खुद लगाना होगा.

चयन प्रक्रिया
जिनका चयन किया जाएगा उनका ग्राम सभा से अनुमोदन यानि अप्रूवल होना चाहिए. ग्राम सभा से अनुमोदित हितग्राहियों का जनपद पंचायत की सभा में अप्रूवल जरूरी है.

जिला पंचायत के अप्रूवल के बाद जिला पंचायत की कृषि स्थाई समिति की बैठक में अनुमोदन प्राप्त करना भी जरूरी है.

संबंधित जिले के निकटतम पशु चिकित्सा अधिकारी, पशु औषधालय के प्रभारी और उपसंचालक पशु चिकित्सा से संपर्क करें.

निष्कर्ष
सरकारी योजना से जहां राज्य में दूध उत्पादन बढ़ेगा तो वहीं दूध उत्पादन बढ़ने से उिमांड के मुताबिक लोगों को अच्छी क्वालिटी का दूध भी मुहैया हो सकेगा. इससे पशुपालकों की इनकम में भी इजाफा होगा.

Written by
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