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El Nino: तालाब की मछलियों पर भी मंडरा रहा रहा है अल नीनो का खतरा

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मछलियों की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. देश में अल नीनो का खतरा मंडरा रहा है. समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक हो जाने के चलते समुद्र का ईको सिस्टम बिगड़ जाता है. जिसके चलते अल नीनो जैसा खतरा सामने आ जाता है. अल नीनो की वजह से जिस तरह का मौसम बदलाव देखे जाने की संभावना है, उससे मछलियों के लिए भी खतरा बहुत ज्यादा है. क्योंकि ऐसी स्थिति में मॉनसून की बारिश कम होगी और गर्मी ज्यादा पड़ेगी. ऐसे में तालाब के पानी का टेंपरेचर बढ़ने से मछलियों को परेशानियां हो सकती है.

अगर आप मछली पालक हैं तो सतर्क हो जाने की जरूरत है. खास तौर पर ऐसे मछली पालकों को जो तालाब में मछली पालन का काम करते हैं, उन्हें तो और ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत है, नहीं तो मछली पालन के काम में अल नीनो जैसा संकट बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है.

प्रजनन क्षमता होगी प्रभावित
जब गर्मी पड़ेगी तो पानी का तापमान अचानक से बढ़ सकता है. जिससे प्रजनन क्षमता मछलियों की प्रभावित होने का सबसे ज्यादा खतरा है.

अधिक गर्म पानी के कारण मछलियों में त्वचा के अल्सर, फंगल और बैक्टीरिया संक्रमण जैसी बीमारियां भी फैलने का खतरा है. उनकी आबादी में भारी गिरावट आ सकती है.

बारिश कम होने की स्थिति में धूप ज्यादा रहेगी. इससे तालाब का पानी कम हो सकता है और घुली हुई ऑक्सीजन भी इसे तालाब में कम हो सकती है.

गर्म पानी और कम पानी वाले तालाब में शैवाल के पनपने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. जिससे ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है.

शैवाल के पनपने की वजह से तालाब में जहरीली गैस का भी उत्पादन होता है. इसकी वजह से मछलियों में मृत्यु दर बढ़ जाती है.

वहीं तालाब के पानी की गुणवत्ता खराब होने के चलते मछलियों में फंगल संक्रमण और अल्सर परजीवी परेशानी भी बढ़ सकती है.

समस्याओं को रोकने ​के लिए पानी में दोपहर 12:00 बजे शाम 4:00 बजे तक एयरेटर चलना चाहिए. तालाब के पानी को 3.5 फुट से 5 फीट कर दें.

अगर ऊपर का पानी गर्म रहेगा तो नीचे का पानी सामान्य बना रहेगा. इससे मछलियों को आराम मिलेगा और उत्पादन प्रभावित नहीं होगा.

निष्कर्ष
अल नीनो के खतरे के बीच मछली पालकों को सतर्क रहने की जरूरत है. ताकि मछली पालन के काम में उन्हें नुकसान न उठाना पड़े.

Written by
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