नई दिल्ली. पशुपालन और डेयरी प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने साल 2026 के तहत विभाग द्वारा आयोजित की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों की विस्तार से समीक्षा की. साथ ही योजनाओं के प्रभावी तरीके से चलाने, लक्ष्य आधारित कार्यप्रणाली तथा पशुपालकों तक योजनाओं का फायदा पहुंचाने के लिए अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए. बैठक में पशुपालन और डेयरी विभाग, मध्य प्रदेश गो संवर्धन बोर्ड व सांची बोर्ड के अधिकारियों ने वर्ष 2026 में किए जाने वाले कार्यों के बारे में प्रजेंटेशन के माध्यम से जानकारी दी. प्रमुख सचिव उमराव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि प्रदेश में दूध उत्पादन को बढ़ावा देने और पशुपालकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए नस्ल सुधार, पशु पोषण, पशु स्वास्थ्य एवं डेयरी विकास से संबंधित कार्यक्रमों को प्राथमिकता के साथ समयबद्ध रूप से लागू किया जाए, जिससे पशुपालकों की आय में लगातार ग्रोथ हो सके. प्रदेश में पशुपालकों की आय बढ़ने एवं दूध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के मकसद से दूध समृद्धि संपर्क अभियान का तीसरा चरण जल्द ही संचालित किया जाएगा.
पशुपालकों से होगा सीधा संवाद
उन्होंने कहा कि दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान अंतर्गत दो चरणों में 12 लाख से अधिक पशु पालकों के घर पहुंचकर सीधा संवाद किया गया.
उन्हें पशुओं के नस्ल सुधार, पशु पोषण व पशु स्वास्थ्य के बारे में जागरूक किया गया. तीसरे चरण में प्रदेश में 3 से 4 पशुओं का पालन करने वाले पशुपालकों से सीधा संवाद किया जाएगा.
उन्हें भी पशुओं के नस्ल सुधार, पशु पोषण व पशु स्वास्थ्य के बारे में जागरूक किया जाएगा.
बैठक में स्वावलंबी गोशाला नीति 2025, डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना, डेयरी विस्तार, सहकारी समितियों के गठन के साथ ही मुर्गीपालन, बकरी पालन के माध्यम से पशुपालकों की आय बढ़ाने के संबंध में चर्चा की.
पशुपालन एवं डेयरी प्रमुख सचिव उमराव ने बताया कि प्रदेश के कई ग्रामों में संस्थागत एवं व्यक्तिगत प्रयासों से नस्ल सुधार कार्यक्रम प्रभावी रूप से चलाए जा रहे हैं. जिससे पशुपालक उन्नत नस्ल का पशुपालन कर अधिक दुग्ध उत्पादन कर रहे हैं.
ऐसे ग्रामों को आदर्श उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करने तथा अन्य ग्रामों को प्रेरित करने के उद्देश्य से प्रदेश में क्षीरधारा ग्राम योजना शुरू की गई है.
यह तीन चरणों में संचालित होगी. पहले चरण में प्रदेश के 5 हज्वर से अधिक गांवों को चुना गया है.
इस योजना के माध्यम से दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने, उन्नत पशुपालन को प्रोत्साहित करने तथा पशु स्वास्थ्य एवं पोषण सुनिश्चित करते हुए ग्राम स्तर पर समय दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए पशुपालकों को जागरूक किया जाएगा.











