नई दिल्ली. केन्द्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि पशुधन जनगणना के मुताबिक हरियाणा में अवर्गीकृत मवेशी सहित स्वदेशी मवेशियों की आबादी 19वीं और 20वीं पशुधन जनगणना के बीच 8 लाख 12 हजार 13 से बढ़कर 9 लाख 49 हजार 541 हो गई है, जो 16.94 प्रतिशत की वृद्धि है. इस योजना के कार्यान्वयन के लिए सरकार ने 113.60 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता राशि जारी की गई है. स्वदेशी नस्लों के दुधारू गोकुल मवेशियो के विकास और संरक्षण तथा दुग्ध उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के साथ ही नस्ल सुधार अवसंरचना स्थापित करने के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत हरियाणा को कई मदद दी गई है.
राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम का उद्देश्य कृत्रिम गर्भाधान का दायरा बढ़ाना और किसानों के घर तक गुणवत्तापूर्ण कृत्रिम गर्भाधान सेवाएं उपलब्ध कराना है. अब तक 9.41 लाख कृत्रिम गर्भाधान किए गए हैं, जिनमें 6.36 लाख पशुओं को ये सुविधा उपलब्ध कराने से 4.7 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं.
सीमेन के उपयोग से नस्ल सुधार कार्यक्रम
इस कार्यक्रम के तहत स्वदेशी नस्लों के लिंग-विभाजित वीर्य को बढ़ावा दिया जाता है. इसके तहत सुनिश्चित गर्भधारण पर लिंग-विभाजित वीर्य की लागत का 50 प्रतिशत तक प्रोत्साहन राशि किसानों को उपलब्ध कराई जाती है.
स्वदेशी तौर पर विकसित लिंग-विभाजित वीर्य उत्पादन तकनीक का शुभारंभ: स्वदेशी तौर पर विकसित लिंग-विभाजित वीर्य उत्पादन तकनीक का भी शुभारंभ किया गया है.
इस तकनीक से लिंग-विभाजित वीर्य की लागत 800 रुपये से घटकर 250 रुपये प्रति खुराक हो गई है.
इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) तकनीक कार्यक्रम के तहत केन्द्रीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने हिसार में राज्य की स्वदेशी नस्लों के तीव्र आनुवंशिक उन्नयन के लिए 1 आईवीएफ प्रयोगशाला स्थापित की है.
आईवीएफ तकनीक का उपयोग कर त्वरित नस्ल सुधार कार्यक्रम आरंभ किया गया है ताकि यह तकनीक किसानों के घर तक पहुंचाई जा सके.
इसके तहत किसानों को सुनिश्चित गर्भधारण पर 5000 रुपये प्रति गर्भधारण की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाती है.
इस कार्यक्रम में हरियाणा सहित देश भर में स्वदेशी नस्लों के विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है.
इस कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक हरियाणा सहित पूरे देश में 7957 भ्रूण स्थानांतरित किए गए हैं, 1588 गर्भधारण स्थापित हुए हैं. इनसे 1149 बछड़े पैदा हुए हैं, जिनमें 1068 मादा बछिया शामिल हैं.
वहीं हरियाणा समेत देश भर में किसानों को स्वदेशी मवेशी नस्लों के महत्व के बारे में जागरूक करने हेतु प्रजनन शिविर, दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता, बछड़ा रैलियां, किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम, संगोष्ठी और कार्यशालाएं, सम्मेलन आदि आयोजित किए गए हैं.











Leave a comment