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Seafood: अब अमेरिकी बाजार में लगातार हो रहा सीफूड एक्सपोर्ट

shrimp farming problems
झींगा की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. फिशरीज सेक्टर को मजबूत करने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है. इसी कड़ी में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत, मत्स्य विभाग मूल्य श्रृंखला में कई प्रकार के हस्तक्षेपों का समर्थन करता है, जिसमें गुणवत्तापूर्ण मछली बीज उत्पादन, खारे पानी की जलीय कृषि का विस्तार और विविधीकरण, निर्यात उन्मुख प्रजातियों को बढ़ावा, प्रौद्योगिकी अपनाना, रोग प्रबंधन, ट्रेसबिलिटी सिस्टम और क्षमता विकास शामिल हैं. साथ ही, निवेश पोस्ट-हार्वेस्ट अवसंरचना, निर्बाध शीत श्रृंखला नेटवर्क, मछली पकड़ने के आधुनिक बंदरगाहों और मछली उतारने के केंद्रों को मजबूत करने में किया जा रहा है.

इसके साथ ही, सरकार उच्च मूल्य वाली प्रजातियों जैसे टूना, सीबास, कोबिया, पॉम्पानो, मड क्रैब, जीआईएफटी तिलापिया, ग्रुपर, टाइगर श्रिंप (पी. मोनोडॉन), स्कैम्पी और सीवीड पर केंद्रित विविधीकृत जलीय कृषि को बढ़ावा दे रही है, जिसका उद्देश्य भारत के उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार करना और अंतरराष्ट्रीय प्रीमियम बाजारों तक पहुंच में सुधार करना है.

झींगा के निर्यात पर प्रतिबंधों दूर करने का किया प्रयास
प्रमुख निर्यात बाजारों तक पहुंच सुरक्षित करने के लिए, भारत लगातार अपने मत्स्य पालन क्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय नियमों और स्थिरता मानकों के अनुरूप बना रहा है.

इसका मुख्य ध्यान अमेरिकी अनुपालन आवश्यकताओं को पूरा करने पर रहा है, विशेषकर मरीन मैमल प्रोटेक्शन एक्ट (एमएमपीए) के तहत, जो समुद्री स्तनधारी अप्रत्यक्ष पकड़ (बाय-कैच) को कम करने के उपायों की मांग करता है.

लागातार कोशिशों जिसमें वैज्ञानिक स्टॉक आकलन और हितधारक परामर्श शामिल थे, के नतीजे में भारत ने साल 2025 में अमेरिकी अधिकारियों से बराबरी की पुष्टि हासिल की.

जिससे दिसंबर 2025 की समय सीमा के बाद भी अमेरिकी बाजार में सीफूड का निरंतर निर्यात सुनिश्चित हुआ.

साथ ही, जंगली पकड़ वाली झींगा के निर्यात पर प्रतिबंधों को दूर करने के लिए श्रिंप ट्रॉलर पर टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (टीईडी) स्थापित करने के कदम उठाए जा रहे हैं, और तटीय राज्यों में इसका बड़े पैमाने पर कार्य प्रगति पर है.

सरकार ने ट्रेसबिलिटी और प्रमाणन प्रणालियों को भी मजबूत किया है, और एक राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा लॉन्च किया है जिससे पूरे प्रसंस्करण चक्र की निगरानी, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित किया जा सके.

भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईज़ेड) में स्थायी मत्स्य पालन को नियंत्रित करने वाले नए नियमों के साथ मिलकर, ये उपाय भारत को एक जिम्मेदार और वैश्विक रूप से अनुपालन करने वाले सीफूड निर्यातक के रूप में स्थापित करने की संगठित पहल को दर्शाते हैं.

मत्स्य पालन क्षेत्र में व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए, मत्स्य विभाग ने कई नियामक और आयात प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित किया है.

सैनिटरी इम्पोर्ट परमिट (एसआईपी) प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल किया गया है और राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे अनुमोदन का समय 30 दिन से घटकर केवल 72 घंटे हो गया है.

Written by
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