नई दिल्ली. पोल्ट्री फार्मिंग का काम मोटे तौर पर दो तरह से किया जाता है. लेयर नस्ल की मुर्गियों को पालकर अंडों का उत्पादन किया जाता है. जबकि ब्रॉयलर मुर्गों को पालकर मीट का उत्पादन होता है और इससे पोल्ट्री फार्मर की कमाई होती है. हम आप जिस पोल्ट्री चिकन को दुकानों से लाकर घर पर पका कर खाते हैं. उसे ब्रॉयलर पोल्ट्री फार्म में पाला जाता है. इस फॉर्म में सिर्फ और सिर्फ मुर्गों का पालन किया जाता है और कुछ तय समय पर एक मुर्गा दो से ढाई किलो तक वजन हासिल कर लेता है. इसके बाद इन्हें चिकन शॉप चलाने वाले व्यापारी खरीदते हैं और कटिंग करके बेच देते हैं.
ब्रॉयलर मुर्गों की पोल्ट्री फार्मिंग करने वाले पोल्ट्री फार्मर चूजों को खरीदते हैं और उन्हें नियमित रूप से फीड खिलाते हैं. ताकि जल्दी से उनका वजन बढ़े और उन्हें बेचकर कमाई की जा सके. इस बिजनेस में कमाई के लिए बहुत ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ता है. सिर्फ 40 दिन में ही रिजल्ट सामने आ जाता है. अगर आप भी जानना चाहते हैं कि मुर्गा फार्म खोलने का बिजनेस कैसे किया जाता है तो इस रिपोर्ट में हम आपको इसकी पूरी जानकारी देने जा रहे हैं.
ज्यादा मुनाफे के लिए 2000 चूजों से शुरू करें ये काम
पोल्ट्री एक्सपोर्ट के मुताबिक 2000 चूजों से ब्रॉयलर मुर्गों का फार्म खोलते हैं तो आप खुद को अच्छी कमाई का मौका देते हैं.
इन चूजों को बड़ा होने और बाजार में बिकने के लिए तैयार होने में 40 दिन का समय लग जाता है. ये तब तक ढाई किलो तक वजन हासिल कर लेते हैं.
इस दौरान पोल्ट्री फार्म में चूजों का अच्छी तरह से ख्याल रखा जाता है. उन्हें ऐसा फीड दिया जाता है, जिसे खाकर वो तेजी के साथ वजन हासिल कर लें.
अगर आप 2000 चूजें लाते हैं और 40 दिन उन्हें खिलाते हैं तो उनका वजन ढाई किलो के हिसाब 5000 किलो हो जाता है.
1 किलो की कीमत अगर 120 लगाई जाए तो 5000 किलो की कीमत 6 लाख रुपए बैठती है.
मोटे तौर पर 40 दिन में 6 लाख रुपए आपके हाथ में आते हैं, लेकिन पोल्ट्री फार्मिंग के दौरान फीड आदि पर खर्च होता है.
पोल्ट्री एक्सपर्ट कहते हैं कि जितनी कमाई होती है उसका आधा फीड, दवा और पोल्ट्री मैनेजमेंट आदि पर खर्च की हो जाता है.
निष्कर्ष
वहीं मुनाफा 3 लाख रुपए हाथ में आता है. अगर देखा जाए तो 40 दिन के अंदर 3 लाख रुपए का मुनाफा किसी काम में मिलता है तो यह बहुत ही अच्छा काम माना जाएगा.











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