Home पशुपालन Goat-Sheep Farming: ओवर ईटिंग से हो सकती है भेड़-बकरियों की मौत, एक्सपर्ट से जानिए क्या करें ?
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Goat-Sheep Farming: ओवर ईटिंग से हो सकती है भेड़-बकरियों की मौत, एक्सपर्ट से जानिए क्या करें ?

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भेड़ और बकरी की प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. भेड़-बकरी अक्सर मैदान में चरती हैं और पशुपालक उसे चराने के लिए भी ले जाते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि चरने की वजह से भेड़-बकरियां में बीमारी भी हो जाती है. इसलिए पशुपालकों को हमेशा ही भेड़-बकरियों के झुंड पर नजर बनाए रखना चाहिए. एनिमल एक्सपर्ट कहते हैं कि ओवर ईटिंग की वजह से ये जानवर बीमार पड़ जाते हैं. कई बार तो उनकी मौत भी हो जाती है. बताते चलें कि करीब 1 साल पहले राजस्थान में इसी बीमारी के कारण 300 से ज्यादा भेड़ की मौत हो चुकी है.

फिर हो जाती है उनकी मौत
एनिमल एक्सपर्ट मोहम्मद राशिद कहते हैं कि जब फसल कट चुकी होती है और खेत खाली पड़े होते हैं, तब भेड़-बकरियों के झुंड को वहां चरने के लिए ले जाया जाता है. भेड़-बकरियां खेत में जमीन पर पड़े हुए अनाज को खाती हैं. इस वजह से कई बार वहां चरते-चरते बहुत ज्यादा खाना खा लेती हैं. ज्यादा खाने की वजह से आंतों में एंडोटॉक्सिमिया नाम का बैक्टीमरिया पनपने लगता है. इसी की वजह से भेड़-बकरियों को दस्त लगते हैं और इसी बैक्टीरिया के चलते उनकी मौत भी हो जाती है.

क्या हैं इस बीमारी के लक्षण
जैसलमेर में तैनात पशुओं के डॉ. देवेंद्र का कहना है कि इस बीमारी का इलाज सिर्फ टीका है जो भेड़-बकरी ठीक है उन्हें तो हम टीका लगा सकते हैं लेकिन बीमार को टीका नहीं लगाया जा सकता. इस बीमारी की बात करें तो पहले भेड़ बकरी को दस्त होने लगते हैं. फिर एकदम से दस्त बंद हो जाते हैं लेकिन दो दिन बाद अचानक बकरी में जरूरत से ज्यादा कमजोरी आ जाती है. वह ठीक से चल भी नहीं पाती है. चलने की कोशिश करती है तो लड़खड़ाकर गिर जाती है. फिर उसे एक दो दस्त आते हैं लेकिन इस बार दस्त के साथ थोड़ा सा खून भी आता है और उनकी मौत हो जाती है.

चारे का कर सकते हैं इंतजामः मौसम बदलने के दौरान भेड़ और बकरियों के चारे के लिए काफी बार दिक्कतें आती हैं. पशुपालक अपने छोटे मवेशियों के लिए चारा स्टोर करके रख सकते हैं. हरे चारे की समस्या को देखते हुए मोरिंगा का पेड़ लगा सकते हैं, इसकी पत्तियां बकरी, भेड़ और बकरों को बहुत अच्छी लगती हैं और ये पेड़ कम पानी में भी अच्छी ग्रोथ करता है। मवेशियों के हरे चारे के लिए ये अच्छा साधन है. किचिन में रखी चावल की भूसी, आटा की चूनी भी मवेशी को दी जा सकती है.

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