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Save Godavan: तारों की चपेट में आकर मर रहा राज्यीय पक्षी, दुनिया में सबसे ज्यादा संख्या सिर्फ जैसलमेर में

Desert National Park, Wildlife Institute Of India, Godavan Bird
गोडावण पक्षी की तस्वीरें

नई दिल्ली. साल 2020 में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की ओर से जैसलमेर जिले के करीब 4000 वर्ग किमी क्षेत्र में कराए गए सर्वे के मुताबिक केवल जैसलमेर जिले में 87 हजार 966 पक्षियों की बिजली के तारों की चपेट में आने से मौत हो गई. राजस्थान क राज्यीय पक्षी गोडावण की जिंदगी भी खतरे में है. जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क (राष्ट्रीय मरू उद्यान) इलाके के लगते क्षेत्र में एक साल में इन पक्षियों की मौत हुई हैं. कुरजां पक्षी की उड़ान के लिए भी अब य तार बाधा बने हुए हैं. सप्रीम कोर्ट क आदेश क बावजूद बिजली कंपनियां ने तारों को जमीन में गाडने का कार्य नहीं किया. उल्टा प्रतिदिन हाईटेंशन लाइनों का जाल बढ़ता जा रहा है.

राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर के थार के रेगिस्तान से लेकर गुजरात के कच्छ तक हाईटेंशन लाइने परिंदों की जान की दुश्मन बनी हुई हैं. जैसलमेर जिले के में कराए गए सर्वे के मुताबिक केवल जैसलमेर जिले में 87 हजार 966 पक्षियों की बिजली के तारों से टकराने और करंट की चपेट में आने से मौत हुई. इन शिकारी तारों का जाल रेगिस्तान में 328 प्रजाति के पक्षियों को मौत के घाट उतार रहा है. इसमें 20 वे पक्षी भी है जो सात समंदर पार से बाड़मेर आकर अना बसेरा कर रहे है.

विश्व में 150 तो अकेले जैसलमेर में 120 गोडावन पक्षी
राजस्थान का राज्यपक्षी गोडावण है. दुनिया में इनकी कुल संख्या महज 150 के करीब बताई जा रही है, जिसमें से अकेले जैसलमेर में ही 120 के आसपास है. ये संख्या भी 2018 की गणना के अनुसार बताई जा रही है. अब दुनिया में सिर्फ जैसलमेर ही है, जहां यह पक्षी प्रजनन कर रहा है. मतलब साफ है कि अगर संख्या भी बढ़ेगी तो भी सिर्फ जैसलमेर में ही. लोगों का मानना है कि हमारे राज्य के राज्यपक्षी को अब केवल जैसलमेर ही जिंदा रखे हुए है. बता दें कि राजस्थान की तत्कालीन सरकार ने 1981 में इसे अपना राज्यपक्षी घोषित किया था.

सर्वे में आए चौकाने वाले आंकड़े
2020 में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की ओर से जैसलमेर जिले के करीब 4000 वर्ग किमी क्षेत्र में कराए गए सर्वे के मुताबिक केवल जैसलमेर जिले में 87 हजार 966 पक्षियों की बिजली के तारों की चपेट में आने से मौत हो गई. इतना ही नहीं सर्वे में ये भी आया है कि 16 फीसदी गोडावण की मौत की वजह ये बिजली के तार बने हुए है. लगातार हो रही मौत के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और उच्च्तम न्यायालय ने 2021 में यह आदेश दिया कि बिजली के तारों को बिजली कंपनियां जमीन में गाडने की व्यवस्था करें.

सौर और पवन ऊर्जा के बढ़ने के कारण फैल गया हे जाल
रिपोर्ट के सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इन तारों को भूमिगत करने के आदेश दिए थे, लेकिन लंबा अरसा बीतने के बाद भी इस पर संबंधित विभाग ने ध्यान दिया. सौर व पवन ऊर्जा के बढ़ते जाल में अब हाल यह हो गया है कि रेगिस्तान में हाईटेंशन लाइनों का जाल बिछता गया और इसके शिकार पक्षी हो रहे हैं. बाड़मेर व जैसलमेर में सौर और पवन ऊर्जा का जाल बढ़ता जा रहा है.

ये था सर्वोच्च न्यायालय का आदेश
साल 2020 में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की ओर से जैसलमेर जिले के करीब 4000 वर्ग किमी क्षेत्र में कराए गए सर्वे के मुताबिक केवल जैसलमेर जिले में 87 हजार 966 पक्षियों की बिजली के तारों से टकराने और करंट की चपेट में आने से मौत हुई. इसके बाद ये मामला देश की सर्वोच्च न्यायलय में पहुंच गया. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को आदेश दिया था कि इन तारों को जमीन में दबाया जाए ताकि इन दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों की जान बचाई जा सके. पांचों बिजली कंपनियों को इसके लिए पाबंद भी किया गया, लेकिन बिजली कंपनियों ने इसको लेकर अभी तक गंभीरता नहीं दिखाई है. कंपनियों की ओर से उच्चतम न्यायालय में बिजली लाइनों को भूमिगत करने का खर्चा ज्यादा आने क तर्क दिया गया. इस पर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल-2021 के आदेश को याद दिलाते हुए कहा था कि हाईटेंशन लाइनों को जमीन में गाड़ने की कार्रर्वा को गंभीरता से लिया जाए.

हर दिन होती है पक्षियों की मौत
पर्यावरणविद् भोराराम भाखर कहते हैं कि हाईटेंशन तारों की चपेट में आकर पक्षियों की मौत होना आम घटन हो गया है. बड़े पक्षी इसकी चपेट में आकर जल्दी मर जाते हैं. बाडमेर-जैसलमेर में डेजर्ट नेशनल पार्क भी हैं. जहां पर दुर्लभ पक्षी हैं. गोडावण इसमें से मुख्य है. इन तारों को जमीन में गाड़ा जाए तो पक्षियों की मौत नहीं होगी. पर्यावरण सुरक्षा के लिए यह बहुत जरूरी है. भै

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