Home मछली पालन Fisheries: इस एक डिवाइस ने दाना चक्रवात से बचाई हजारों मछुआरों की जान और उनकी मोटर बोट, जानें कैसे
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Fisheries: इस एक डिवाइस ने दाना चक्रवात से बचाई हजारों मछुआरों की जान और उनकी मोटर बोट, जानें कैसे

गर्मी में भी मछली के तालाबों में पानी का स्तर लगभग 6 फीट रखा जाना चाहिए. इससे निचले हिस्से में पानी का तापमान उपयुक्त रहता है.
प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली. कुछ खास वैराइटी की बड़ी मात्रा में मछली पकड़ने के लिए मछुआरों को गहरे समुद्र में जाना पड़ता है. गहरे समुद्र में भी कहां और कब मछलियां मिलेंगी ये भी तय नहीं होता है, इसलिए मछुआरों को समुद्र में कई-कई दिन बीताने पड़ते हैं. इस दौरान मछुआरों की जान गहरे समुद्र में ही फंसी रहती है. ऐसी जगहों पर मोबाइल फोन भी काम नहीं करते हैं तो घर वालों और दूसरे लोगों से कोई संपर्क नहीं हो पाता है. लेकिन केन्द्र सरकार ने एक खास डिवाइस की मदद से इस परेशानी का तोड़ निकाल लिया है. अब मछुआरों की जान गहरे समुद्र में नहीं फंसती है.

हाल ही में जब दाना चक्रवात आया तो हजारों मछुआरों की जान और उनकी नाव, मोटर बोट सिर्फ इस खास डिवाइस की वजह से ही बच सकीं. चक्रवात आने से पहले ही वक्त रहते मछुआरे अपनी मोटर बोट लेकर किनारे पर आ गए. पारादीप के पास ही इस डिवाइस की मदद से वक्त पर सूचना मिलते ही 126 मोटर बोट 22 अक्टूबर को ही किनारे पर वापस आ गईं. जबकि ये बहुत गहरे समुद्र में पहुंच गईं थी.

एक साथ कई विभाग से जुड़ जाएंगे मछुआरे
मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय (MoFAH&D) पीएम नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत टू वे कम्यूनिकेशन सिस्टम डिवाइस ट्रांसपोंडर का मछुआरों को दे रहा है. इस डिवाइस को मछुआरे मोटर बोट पर लगाकर एक साथ कई विभाग के साथ जुड़ जाते हैं. जिसके चलते उन्हें समुद्र और मौसम के बारे में हर तरह की जानकारी वक्त रहते मिल जाती है और खतरे की सूचना भेज भी देते हैं.

364 करोड़ रुपये से एक लाख बोट में लगाए जा रहे ट्रांसपोंडर
मंत्रालय से जुड़े जानकारों के मुताबिक समुद्र में मछुआरों की सुरक्षा बढ़ाने में सफलता हासिल होने लगी हे. अभी 30 अगस्त, 2024 को ही महाराष्ट्र के पालघर में हुए एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने इस परियोजना की शुरुआत की थी. इस पर 364 करोड़ रुपये का खर्च आया है. ये ट्रांसपोंडर मछुआरों को फ्री में दिए जा रहे हैं. ये पूरी तरह से स्वदेशी और इसरों की मदद से बने ट्रांसपोंडर हैं. अभी इन्हें 13 तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक लाख मछली पकड़ने वाले जहाजों पर लगाने का काम चल रहा है.

ओडिशा में ट्रांसपोंडर से 20 अक्टूबर को ही मिल गई थी सूचना
जानकारों का कहना है कि हाल ही में ओडिशा के तट और बंगाल की खाड़ी से लगे आसपास के इलाकों में दाना चक्रवात आया था. अच्छी बात ये रही कि गहरे समुद्र में जाने वाली एक हजार के करीब मोटर बोट में ट्रांसपोंडर लग चुके थे. इसी के चलते संबंधि‍त विभागों ने 20 अक्टूबर की दोपहर ही बुलेटिन में दाना चक्रवात की सूचना देते हुए मछुआरों को गहरे समुद्र से लौटने की चेतावनी जारी कर दी थी. साथ ही 21 से 26 अक्टूबर 2024 तक मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई थी. अंग्रेजी और उड़ीया भाषा में ये सूचना-चेतावनी कुछ इस तरह से दी गई थी, “समुद्र में मौजूद मछुआरों को तुरंत तट पर लौटने की सलाह दी जाती है, और मछुआरों को ये भी सलाह दी जाती है कि वे 21 से 26 अक्टूबर 2024 के दौरान ओडिशा तट और उससे सटे उत्तरी बंगाल की खाड़ी के समुद्र में न जाएं.”

20 मीटर से कम है लम्बाई
जानकारों का कहना है कि शुरुआत में जिन मोटर बोट पर ट्रांसपोंडर लगाए जा रहे हैं वो 20 मीटर से कम लम्बाई की हैं. मछुआरों की नौकाओं की निगरानी करने वाली एजेंसियां इसके माध्यम से मछुआरों को हर तरह की जानकारी भेज रही हैं. जैसे अगर मौसम खराब है या होने वाला है तो उन्हें चेतावनी दे दी जाएगी. लोकेशन भी बताई जाएगी. साथ ही टू वे कम्युनिकेशन होने के चलते मछुआरे भी परेशानी के दौरान मैसेज भेज सकेंगे और मदद मांग सकेंगे. सरकार का कहना है कि इससे मछुआरों का कारोबार भी बढ़ेगा और वो काम करने के दौरान जोखिम में भी नहीं फंसेंगे.

Written by
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