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Animal News: तेजी से फैल रहे रोग, पशुओं की बीमारियां कैसे होंगी कंट्रोल, वेटरनरी डॉक्टर ने ली ट्रेनिंग

ट्रेनिंग के जरिए रोग ग्रस्त पशुओं के ब्लड, यूरिन, गोबर आदि नमूने प्रयोगशालाओं में परीक्षण के लिए भेजने के तरीकों को समझने का मौका मिलेगा, ताकि रोगग्रस्त पशुओं को उचित इलाज मिल सके.
ट्रेनिंग में जानकारी लेते पशु चिकित्सक।

नई दिल्ली. आजकल पशुओं में संक्रामक रोग काफी तेजी से फैल रहे हैं. अगर समय पर इन बीमारियों का इलाज किया जाए और इनकी देखरेख की जाए तो संक्रमण को कंट्रोल कर सकते हैं. बीकानेर के एपेक्स सेंटर ने पशुओं व मुर्गियों में रोग निदान की नवीनतम तकनीकों पर एक कार्यक्रम किया, जिसमें बीमारियों को कंट्रोल करने के लिए उसकी जानकारी पर बात हुई. मुख्य अतिथि कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने कहा कि पशुचिकित्सकों को विभिन्न संक्रामक बीमारियों के रोग निदान की पूरी जानकारी जरूरी है.पशुओं में संक्रामक रोग बहुत तेजी से फैलते है. समय पर रोग निदान या डायग्नोसिस हो जाए तो इलाज से इनफेक्शन को कंट्रोल कर सकते हैं.

कुलपति ने स्थानीय निदान विधियों के महत्व और वेटरनरी में फीडबैक सिस्टम के उपयोग पर भी बात की. उन्होंने पुरानी पशुचिकित्सा साहित्य जैसे “शालिहोत्र संहिता” और स्थानीय ज्ञान की उपयोगिता पर भी बातचीत की. वर्कशॉप में विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रोफेसर हेमन्त दाधीच ने कहा कि इस वर्कशॉप से पशुचिकित्सकों को पोस्टमार्टम के आधार पर पशुओं में रोग-निदान के विभिन्न तरीकों को समझने का मौका मिलेगा जो कि रोग कंट्रोल में मदद करेगा.

पशुओं एवं मुर्गियों में रोग की नवीनतम तकनीकों पर ली ट्रेनिंग
विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त निदेशक डॉ. गीता बेनीवाल ने कहा कि पशुचिकित्सकों को ट्रेनिंग के जरिए रोग ग्रस्त पशुओं के ब्लड, यूरिन, गोबर आदि नमूने प्रयोगशालाओं में परीक्षण के लिए भेजने के तरीकों को समझने का मौका मिलेगा, ताकि रोगग्रस्त पशुओं को उचित इलाज मिल सके. प्रशिक्षण समन्वयक एवं प्रभारी अधिकारी एपेक्स सेन्टर डॉक्टर राजेश सिंगाठिया ने ट्रेनिंग प्रोग्राम की जानकारी देते हुए बताया कि तीन दिन की ट्रेनिंग में बीकानेर, चूरू, श्रीगगांनगर एवं हनुमानगढ़ जिले में कार्यरत 25 पशुचिकित्सक ट्रेनिंग ले रहे है.

पशु जैव चिकित्सकीय अपशिष्ट के उचित प्रबन्धन एवं निस्तारण पर ली ट्रेनिंग
पशु जैव चिकित्सकीय अपशिष्ट निस्तारण तकनीकी केंद्र, राजुवास, बीकानेर द्वारा पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय, बीकानेर के विभिन्न विभागों में पढ़ रहे स्नातकोत्तर एवं विद्या वाचस्पति छात्र-छात्राओं को पशु जैव चिकित्सकीय अपशिष्ट के उचित प्रबंधन और निस्तारण विषय पर एक दिवसीय ट्रेनिंग दी गई. केन्द्र की प्रमुख अन्वेषण डॉ. दीपिका धूड़िया ने कहा कि जैव चिकित्सकीय अपशिष्ट के उचित निस्तारण एवं प्रबंधन के प्रति जागरूगता अति आवश्यक हो गई है. विश्वविद्यालय, चिकित्सालयों में कार्यरत कर्मचारियों को एवं पशु चिकित्सा स्नातकोत्तर एवं पशु चिकित्सा वाचस्पति विद्यार्थियों को इसका प्रायोगिक ज्ञान होना बहुत आवश्यक है ताकि वे खुद को एवं समाज को संक्रामक बीमारियों से बचा सकें और वातावरण को प्रदूषित होने से भी बचा सकें। डॉ. वैशाली ने ट्रेनिंग के लिए आए स्टूडेंट्स को बायोमेडिकल अवशेष के उचित निस्तारण का प्रायोगिक ज्ञान प्रदान किया। प्रशिक्षण समापन पर डॉ. बी.एन. श्रृंगी निदेशक अनुसंधान ने विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र बांटे.

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