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इस जिले से बाहर क्यों नहीं जा सकेगा चारा, डीएम ने लगाई रोक, जानें वजह

चारे की फसल उगाने का एक खास समय होता है, जोकि अलग-अलग चारे के लिए अलग-अलग है.
प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली. गर्मी की शुरुआत होते ही जगह-जगह चारे की कमी हो जाती है. ऐसे में किसानों को बहुत ही मुश्किल से पशुओं के लिए चारा मिल पाता. ऐसे में पशुओं को पौष्टिक और हरा चारा कहां से लाएं. इसे लेकर पशुपालक बहुत ज्यादा परेशान रहते हैं. महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सूखा पड़ने की वजह से भीषण चारे का संकट पैदा हो गया है. यही वजह है कि महाराष्ट्र के लातूर जिले में प्रशासन ने जिले से बाहर चारे के ले जाने पर पाबंदी लगा दी है. ये पाबंदी वहां की डीएम ने लगाई है, जिससे लातूर के पशुओं के सामने चारे का संकट पैदा न हो सके.

पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि महाराष्ट्र के लातूर जिले में प्रशासन ने क्षेत्र में सूखे जैसी स्थिति के बीच संभावित कमी के मद्देनजर जिले के बाहर चारे के परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया है. अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार ने औसा, निलंगा, शिरूर अनंतपाल, उदगीर, जलकोट, देवनी, चाकुर और अहमदपुर तालुका के 46 राजस्व क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति घोषित की है. उन्होंने कहा, कलेक्टर वर्षा ठाकुर-घुगे द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अगले छह महीने (अगस्त तक) तक जिले के बाहर चारे का परिवहन नहीं किया जा सकता है.
उन्होंने बताया कि यह प्रतिबंध गुरुवार से लागू हो गया है.

चारे के जिले से बाहर ले जाने पर लगा दिया प्रतिबंध
समाचार एजेंसी ने बताया कि जनवरी में पड़ोसी धाराशिव जिले में प्रशासन ने संभावित कमी को देखते हुए जिले के बाहर चारे के परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया था. अधिकारी ने कहा कि इस बीच, लातूर प्रशासन ने गांवों में पानी की आपूर्ति के लिए 53 कुओं का अधिग्रहण किया है.इससे पहले दिसंबर 2023 में जिले में सूखे से निपटने के लिए 4.29 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे.आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जिले में 134 छोटी परियोजनाएँ हैं जिनमें 8 मार्च तक करीब 14 प्रतिशत जल भंडारण था, जबकि पिछले साल इसी दिन इन परियोजनाओं में जल भंडारण 42 प्रतिशत था. एक अन्य अधिकारी ने कहा कि आठ मध्यम परियोजनाओं में जल भंडारण 11 प्रतिशत था, जबकि पिछले साल यह 52 प्रतिशत था. लातूर नगर निगम के एक अधिकारी ने कहा, लातूर शहर जनवरी से पानी की कटौती का सामना कर रहा है.

बीएमसी ने की पानी कम खर्च करने की अपील
इस बीच, मुंबई नगर निगम यानी बीएमसी ने गुरुवार को 4 अप्रैल-2024 तक शहर भर में पांच प्रतिशत पानी की कटौती की घोषणा की और नागरिकों से पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने का आग्रह किया. बीएमसी ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, पानी में कटौती भांडुप जल उपचार संयंत्र में किए जा रहे प्री-मानसून संरक्षण कार्य के कारण है. शहर के भांडुप उपनगर में एशिया का सबसे बड़ा जल उपचार संयंत्र है और यह महानगर के अधिकांश हिस्सों में पानी की आपूर्ति करता है. भांडुप परिसर में 1,910 मिलियन लीटर और 900 मिलियन लीटर क्षमता की दो जल उपचार इकाइयां हैं. नगर निकाय ने नागरिकों से पानी का संयमित और विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील की है.

ऐसे में मोरिंगा की खेती हो सकती है फायदेमंद
वैज्ञानिक डॉक्टर मोहम्मद आरिफ ने बताया कि मोरिंगा को बरसात के सीजन में लगाया जाए तो ज्यादा बेहतर है. बारिश में ये बड़े ही आसानी से लग जाता है. अभी गर्मी का मौसम है. अब से लेकर जुलाई तक मोरिंगा लगाना शुरू कर दिया जाए तो लाभकारी होगा. ख्याल यह रखना है कि इसे पेड़ नहीं बनने देना है. इसके लिए यह जरूरी है कि 30 से 45 सेंटी मीटर की दूरी पर इसकी बुवाई की जाए. इसकी पहली कटाई तीन महीने बाद करनी है. तीन महीने में यह आठ से नौ फीट की हाईट पर आ जाता है. इसी तरह से पहली कटाई 90 दिन में करने के बाद इसकी कटाई हर 60 दिन बाद करनी है. इसकी कटाई जमीन से एक-डेढ़ फीस की हाइट से करनी है. मोरिंगा की पत्तियों के साथ ही तने को भी बकरियां बड़े चाव से खाती हैं. चाहें तो पशुपालक पहले बकरियों को पत्तियां खिला सकते हैं. इसके तने को अलग रखकर उसके पैलेट्स बना सकते हैं. पैलेट्स बनाने का एक अलग तरीका है. ऐसा करके आप बकरे और बकरियों के लिए पूरे साल के चारे का इंतजाम कर सकते हैं.

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