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Fish Farming: ठंड के दिनों में तालाब में क्यों डालना चाहिए चूना, एक एकड़ में कितनी मात्रा में डालें, पढ़ें यहां

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. वैसे तो मछली पालन ने एक बेहद ही फायदेमंद कारोबार है. इसे आम आदमी आसानी के साथ कर सकता है. फिश एक्सपर्ट कहते हैं कि मछली पालन में ज्यादा मजदूरी की जरूरत नहीं होती है. जबकि मछलियों के ज्यादा बीमार होने की संभावना भी नहीं रहती है. जबकि इस व्यवसाय की सबसे बड़ी और सबसे अच्छी खासियत यह है कि जरूरत पड़ने पर साइज के हिसाब से मछली का दाम मिल जाता है. हालांकि ठंड के समय में मछलियों को कुछ दिक्कतें जरूर होती हैं. जिसकी वजह से इस कारोबार में नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. इसलिए ठंड में मछलियों का खास ख्याल रखने की जरूरत पड़ती है.

फिश एक्सपर्ट कहते हैं की मछली पालन करने के दौरान सर्दियों के दिनों में मछली पालन में उनकी मृत्युदर की वजह से 60 फीसदी तक नुकसान होने की संभावना रहती है. कई बार मछलियों की मृत्युदर बढ़ जाती है तो कई बार उनकी ग्रोथ रुक जाती है. हालांकि सही तकनीक का इस्तेमाल करके इन परेशानियों से बचा जा सकता है. सर्दी के दिनों में मछलियों की पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है. इसके चलते वो जरूरत के मुताबिक फीड नहीं ले पाती हैं. जबकि सांस लेने दिक्कत आ​ती और हृदय गति भी कम हो जाती है. इससे भी मछलियों को दिक्कत होती है.

तालाब में जरूर डालें चूना
ठंड के दौरान मछलियों के पालन के दौरान तालाब में चूने की बड़ी ही अहमियत हो जाती है. एक्सपर्ट का कहना है कि पानी के संतुलन को बनाए रखने के लिए चूने का इस्तेमाल समय-समय पर करते रहना चाहिए. अगर किसी फिश फार्मर्स ने एक एकड़ में मछली पालन किया है तो इतने बड़े तालाब में लगभग 100 किलोग्राम चूने का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. चूना पानी को शुद्ध बना देता है. इसे मछलियों को ऑक्सीजन लेने में कोई दिक्कत ना आए. क्योंकि ठंड के दिनों में पानी में ऑक्सीजन की भी कमी हो जाती है. ऑक्सीजन कमी को दूर करने के लिए एयर्रेटर का इस्तेमाल किया जाता है.

ठंड में होती हैं ये भी दिक्कतें
वहीं ठंड के दिनों में मछलियों की नियमित रूप से जांच की जानी चाहिए. अगर बीमारियों के लक्षण दिखाई दे तो तुरंत उपचार करना चाहिए. पानी में अक्सर कवक संक्रमण हो जाता है. जिसकी वजह से मछलियां बीमार पड़ने लगती हैं. ऐसे में कवक संक्रमण को हटाने के लिए कॉपर सल्फेट का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है. वहीं पानी के अंदर कीड़ों को खत्म करने के लिए जैविक कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है. इसका इस्तेमाल करने से पहले एक्सपर्ट की राय लेना भी जरूरी होता है.

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