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Veterinary University: ‘छात्र अपने ज्ञान से आगे बढ़ाएं समाज’, दीक्षांत समारोह में उपाधियां और पदक बांटे

विद्यार्थियों को अर्जित ज्ञान का उपयोग पशुओं, पशुपालकों एवं समाज के उत्थान के लिए करना चाहिए: राज्यपाल हरिभाऊ बागडे
वेटरनरी विश्वविद्यालय, बीकानेर के अष्टम दीक्षांत समारोह में मौजूद राज्यपाल व अन्य।

नई दिल्ली. राजस्थान दुग्ध उत्पादन में अग्रणी राज्य है, दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिला है. जिस गांव या शहर में दुग्ध मार्केटिंग एवं विपणन सुविधा का विकास होगा, वहां पशुपालकों को दुग्ध उत्पादन में प्रोत्साहन मिलेगा. दुग्ध विपणन व्यवस्था मजबूत करके दुग्ध व्यवसाय को बढ़ावा दे सकते है. राजस्थान में चरागाह के सीमित होने एवं आधुनिक यातायात व्यवस्था से ऊंटों का उपयोग कम हुआ और संख्या भी कम हुई. ऊंट पालकों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रोत्साहित करके ऊष्ट्र संरक्षण कर सकते है. विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ बौद्धिक एवं शारीरिक विकास पर भी ध्यान देना चाहिए. विद्यार्थियों को अर्जित उपाधियों एवं ज्ञान का उपयोग पशुओं, पशुपालकों एवं समाज के उत्थान के लिए करना चाहिए और शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों में उत्कृष्टता हासिल करनी चाहिए. ये बातें वेटरनरी विश्वविद्यालय के अष्टम् दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने कहीं. उन्होंने वेटरनरी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पशुचिकित्सा एवं पशु विज्ञान के 515 छात्र-छात्राओं को उपाधियां, 8 को स्वर्ण पदक, 1 रजत एवं 1 कांस्य पदक प्रदान किया गया. उन्होंने कहा कि शालिहोत्र पशुचिकित्सक ग्रंथ का वैदिक चिकित्सकीय ज्ञान सभी विद्यार्थियों का होना चाहिए.

राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने विद्यार्थियों को गुरु दक्षिणा के नाम एक पौधा लगाने को प्रेरित किया. समारोह के दीक्षांत अतिथि प्रो. नितीन वी. पाटिल कुलपति, महाराष्ट्र पशु एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय, नागपुर (महाराष्ट्र) ने छात्रों को बधाई दी. कहा, कि यह वास्तव में उन सभी लोगों के लिए गर्व की बात है जो इस विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से ही इससे जुड़े रहे हैं, जिन्होंने राज्य और देश के पशुपालकों को लाभ पहुंचाने के लिए पशु चिकित्सा विज्ञान में ज्ञान के भंडार को समृद्ध करने में योगदान दिया है. भारतीय कृषि और पशुपालन अपार ज्ञान और नई खोजों की संभावनाओं से भरा है. हमें पशुपालकों द्वारा अपनाई जाने वाली विधियों के सकारात्मक रुझानों का विश्लेषण करते हुए आगे बढ़ना चाहिए. देश में बढ़ती आबादी के कारण पशु आधारित खाद्य पदार्थों की मांग हमेशा से रही है. पशु स्वास्थ्य से समझौता करके शुद्ध पशु उत्पादों की कल्पना नहीं की जा सकती. मनुष्यों और पशुओं में संक्रामक रोगों का प्रकोप भी हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है. लम्पी, बुसेलेसिस आदि बीमारियों से पशुपालकों को नुकसान हुआ है. एकल स्वास्थ्य दृष्टिकोण पर ध्यान केंद्रित करके, कृषि और पशुपालन विषयों पर एकीकृत अनुसंधान और नई खोजों और प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण से हम इन चुनौतियों का समाधान कर सकते हैं और समाज को बेहतर मानव और पशु स्वास्थ्य प्रदान कर सकते हैं.

मुख्य अतिथि ने कही ये बात: मुख्य अतिथि जोराराम कुमावत, मंत्री पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग, ने कहा कि पशुपालन राजस्थान के जन-मानस का मूल आधार है व किसानों की आजीविका का भी मूल बात हैं. इसलिए राजस्थान में पशुचिकित्सक एवं पशुपालक प्रादेशिक अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार है. पशुधन स्थानीय लोगों की सामाजिक और आर्थिक सम्पन्नता का प्रतीक है। इसलिए पशुधन उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ किसान और समाज के पिछड़े वर्गों के परिवारों को रोजगार के संसाधन उपलब्ध करवा कर उन्हें आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाए जाने के लिए आप सभी शोधकर्ताओं के निरंतर कार्य करने की जरूरत है. पशुचिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान में गुणवत्ता के साथ पशुचिकित्सा शिक्षा के प्रसार कार्यों को अच्छे स्तर पर पहुंचाए जाने की भी आज सबसे अधिक जरूरत है. राज्य सरकार पशुपालकों को कई तरह की योजनाओं के माध्यम से लाभ पहुंचा रही है.

कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने कहा: इस दीक्षांत समारोह के कुल 433 छात्र-छात्राओं को स्नातक, 71 को स्नातकोत्तर एवं 11 को विद्यावाचस्पति सहित कुल 515 उपाधियां प्रदान की गई. शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 8 स्वर्ण, 1 रजत एवं 1 कांस्य पदकों सम्मानित किया गया. कुलपति आचार्य दीक्षित ने विश्वविद्यालय द्वारा शिक्षा, अनुसंधान व प्रसार एवं प्रशासनिक गतिविधियों की जानकारी दी. कुलपति ने विश्वविद्यालय द्वारा पशुपालकों को प्रदान की जाने वाली अत्याधुनिक चिकित्सकीय सुविधाओं का जिक्र किया एवं आईसीएआर एवं राज्य बजट से स्वीकृत शोध परियोजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान की एवं शिक्षकों के पदोन्नति का जिक्र किया. इस अवसर पर राजुवास की बुक स्टॉल भी लगाई गई। माननीय राज्यपाल महोदय को विश्वविद्यालय शिक्षकों द्वारा लिखित पुस्तक ग्रंथ भी माननीय राज्यपाल महोदय को भेंट की.

ये रहे मौजूद : दीक्षांत समारोह में राज्यपाल के प्रमुख विशेषाधिकारी राजकुमार सागर, एडी सी. विकास श्योराण, विधायक, बीकानेर (पश्चिम) जेठानन्द व्यास, चंपालाल गेदर, श्याम पंचारिया, सुधा आचार्य, जिला कलेक्टर बीकानेर नम्रता वृष्णि, कावेंद्र सागर एसपी, आरती दीक्षित, कुलपति एसकेआरएयू. प्रो. अरुण कुमार, मंत्रेश सिंह, प्रबन्ध मंडल एवं अकादमिक परिषद के सदस्य, विश्वविद्यालय के सेवानिवृत शिक्षक एवं अधिकारी, विश्वविद्यालय के डीन-डायरेक्टर, शिक्षक, कर्मचारी, दीक्षांत विद्यार्थी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे.

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