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Fish Farming Business : कम लागत में बंपर कमाई देती है कतला मछली, डेढ़ KG तक होता है वेट

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प्रतीकात्मक फोटो. Livestockanimalnews

नई दिल्ली. भारत में ऐसे कई राज्य हैं, जहां पर मछली पालन बड़े पैमाने पर किया जाता है. किसानों को सब्सिडी भी सरकार मुहैया करती है. हालांकि इन सबके बावजूद किसान यह तय नहीं कर पाते कि किस प्रजाति के मछली का पालन करें. जिससे उन्हें फायदा हो. इससे कम समय और कम लागत में अधिक कमाई होती है. अगर मछली पालन के बारे में सोच रहे हैं तो उसकी प्रजाति को लेकर भी उलझन में होंगे लेकिन आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है. आज आपको एक ऐसी मछली की प्रजाति के बारे में हम बताने जा रहे हैं, जिसका पालन करने पर बंपर कमाई होगी.

हम यहां जिस मछली का जिक्र करने जा रहे हैं, उसे नॉन वेजिटेरियन लोग बहुत पसंद करते हैं. इस मछली का स्वाद दिखने बहुत अच्छा होता है. इसे कतला मछली के रूप के नाम पर जाना जाता है. बहुत तेजी के साथ यह मछली बढ़ती है. बांग्लादेश के किसान कतला मछली का सबसे ज्यादा पालन करते हैं.

डेढ़ किलो हो जाता है वजन: खास बात यह है कि भारत के कई राज्यों में कतला भाकुर के नाम से भी जाना जाता है. इसमें प्रोटीन काफी ज्यादा मात्रा में होता है. अगर किसान चाहें तो गहरे टैंक के अंदर भी इसका पालन कर सकते हैं. ऐसे प्राकृतिक रूप से कतला मछली धान के खेतों में पाई जाती है. एक साल में इसका वजन डेढ़ किलो तक हो जाता है.

हमेशा रहती है डिमांड: कतला मछली के लिए 25 से 32 डिग्री का तापमान अच्छा माना गया है. अगर चाहें तो घर के अंदर भी इसका पालन शुरू कर सकते हैं. क्योंकि घर या मछली मीठे और साफ पानी में रहना पसंद करती है. आपको मार्केट में आसानी से कतला मछली के बीज मिल जाएंगे. मछली पालन शुरू करने बाद 6 से 8 महीने में तैयार हो जाती है. स्वाद अच्छा होता है. मार्केट में कतला की डिमांड हमेशा बनी रहती है.

अच्छी कीमत मिलती है: कतला मछली आमतौर में पानी के ऊपर आकर खाना खाती है. यह ज्यादातर कीड़े मकोड़े को खाना पसंद करती है. इसलिए किसान कतला मछली के तालाब में ऐसे दाने डालें जो पानी में डूबे नहीं और मछली का वजन 500 ग्राम के आसपास हो जाने पर आप तालाब में जाल डाल सकते हैं. मार्केट में इसकी कीमत 140 से 160 रुपये किलो की बीच रहती है. अगर एक एकड़ के तालाब में शुरू करते हैं तो साल में लाखों रुपये कमा सकते हैं.

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