नई दिल्ली. राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड डेयरी फूड्स में आयुर्वेद-आधारित इनोवेशन को शामिल करने पर जोर दे रहा है. इसका मतलब दूध और उससे बने उत्पादों में पारंपरिक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों, सिद्धांतों और तकनीकों को शामिल किया जाना है. इससे मौजूदा वक्त की पोषण की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है और साथ ही स्वास्थ्य, पाचन और इम्युनिटी को भी बढ़ाया जा सकता है. इसी कड़ में एनडीडीबी के चेयरमैन डॉ. मीनेश सी. शाह ने ‘डेयरी फूड्स में आयुर्वेद-आधारित इनोवेशन’ पर आयोजित एक नेशनल सेमिनार में हिस्सा लिया.
यह सेमिनार ICAR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल न्यूट्रिशन एंड फिजियोलॉजी और इंडियन डेयरी एसोसिएशन-साउथ ज़ोन की एक संयुक्त पहल थी, जो ‘वर्ल्ड मिल्क डे 2026’ के मौके पर आयोजित की गई थी. डॉ. शाह के अलावा सेमिनार में पद्म डॉ. एन. पुन्नियामूर्ति, ICAR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल न्यूट्रिशन एंड फिजियोलॉजी (NIANP बैंगलोर) के डायरेक्टर डॉ. आर्टबंधु साहू और IDA-साउथ जोन के चेयरमैन डॉ. सतीश कुलकर्णी की भी मौजूदगी रही.
औषधीय गुणों की हुई पहचान
अपने भाषण में, NDDB के चेयरमैन ने पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक डेयरी विज्ञान को मिलाकर प्राकृतिक और विज्ञान-आधारित पोषण की ओर वैश्विक बदलाव का नेतृत्व करने के भारत के खास मौके पर जोर दिया.
उन्होंने बताया कि दूध पोषण के लिहाज़ से एक संपूर्ण आहार है, जिसके हड्डियों की सेहत, मांसपेशियों के विकास और समग्र स्वास्थ्य के लिए कई स्थापित फायदे हैं.
वहीं, दही, छाछ और घी जैसे पारंपरिक डेयरी उत्पादों में औषधीय गुण होते हैं, जिनकी पुष्टि अब आधुनिक रिसर्च से भी हो रही है.
उन्होंने स्वास्थ्य और वेलनेस पर केंद्रित पोषण के लिए ग्राहकों की बढ़ती मांग को पूरा करने के मकसद से आयुर्वेद-प्रेरित डेयरी इनोवेशन की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला.
इनमें फंक्शनल फूड्स, फर्मेंटेड डेयरी उत्पाद, औषधीय घी के फ़ॉर्मूलेशन और जड़ी-बूटियों से युक्त डेयरी उत्पाद शामिल हैं.
इस दिशा में NDDB की कोशिशों का ज़िक्र करते हुए, डॉ. शाह ने त्रिफला छाछ, इम्यूनिटी बढ़ाने वाले न्यूट्रिशन प्रीमिक्स और पशुओं की बीमारियों के इलाज के लिए EVM फ़ॉर्मूलेशन को बढ़ावा देने जैसी पहलों के बारे में बात की.
उन्होंने रिसर्चर्स, इंडस्ट्री लीडर्स और संस्थानों से अपील की कि वे विज्ञान-आधारित इनोवेशन के जरिए ग्राहकों का भरोसा जीतें और डेयरी फूड इनोवेशन की अगली लहर में भारत को सबसे आगे ले जाने के लिए मिलकर काम करें
निष्कर्ष
बताते चलें कि इनावेश में साधारण दूध, दही या पनीर में अश्वगंधा, हल्दी, ब्राह्मी, शतावरी या तुलसी जैसी जड़ी-बूटियों को मिलाना शामिल है. इसके तहत ऐसे डेयरी प्रोडक्ट को तैयार करना है जो पेट के लिए हल्के हों.












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