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Mobile App: पशुपालन में एप करेगा किसानों की मदद, यहां पढ़ें इसकी क्या है खासियत

गर्मियों में पशु बहुत जल्द बीमार होते हैं. अगर ठीक से इनकी देखरेख कर ली जाए तो हम पशुओं को बीमार होने से बचा सकते हैं.
प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली. पशुधन की देखभाल के मकसद से महाराष्ट्र सरकार ने कृषि विभाग से एक अलग मोबाइल है तैयार करवाया है. इस मोबाइल एप को लेकर दावा किया जा रहा है कि देश का पहला मोबाइल पशु परामर्श एप है. जो अलग-अलग स्थिति में पशुपालकों की मदद कर सकता है. सरकार ने इसका नाम फुले अमृतकाल पशुसल्ला मोबाइल एप रखा है. महात्मा फुले कृषि विश्वविद्यालय के देसी गाय अनुसंधान प्रशिक्षण केंद्र के तहत पशुपालन और डेयरी विज्ञान विभाग द्वारा इसे विकसित किया गया है.

महाराष्ट्र के कृषि मंत्री धनंजय मुंडे ने इसकी शुरुआत की और उन्होंने इसकी खासियत और जरूरत के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन के की वजह से आंधी, भारी बारिश, बादल फटना, तापमान वृद्धि, लू और अप्रत्याशी बारिश का पैटर्न लगातार देखने को मिल रहा है. इससे न केवल पशुओं के लिए चारा-पानी की व्यवस्था प्रभावित हो रही है. बल्कि पशुधन के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ रहा है. संकर गायों और भैंसे में दूध उत्पादन पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव देखा गया है.

प्ले स्टोर पर भी है उपलब्ध
इसकी वजह से गायों के दूध उत्पादन में 5 से 20 फीसदी की कमी देखी गई है. इसी सब चुनौतियां से पार पाने के लिए ये एप काफी अहम भूमिका निभा सकता है. इस एप की मदद से किसान समय-समय पर जानवरों की गर्मी के तनाव को कम करने के लिए छाया प्रदान करना, उचित वेंटिलेशन बनाए रखना, पीने के लिए ठंडी पानी की उपलब्ध कराना, पंखा या फॉगर प्रणाली को स्वचालित रूप से चालू करने और संतुलित आहार की योजना बनाने आदि उपायों की योजना बना सकते हैं. इस एप के उपयोग के लिए गूगल प्ले स्टोर से भी फुल अमृतकाल डाउनलोड किया जा सकता है.

किसानों को देगा सलाह
फिर आपको रजिस्टर करना होगा और अपना मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा. ओटीपी प्राप्त करने के बाद अपना नाम पता स्थान दर्ज करें और ऐप खोलें. इस एप पर गौशाला या स्थान का चयन करना चाहते हैं तो उस स्थान का तापमान, आर्द्रता सूचकांक देखने को मिल जाएगी. इसके लिए गायों के तनाव को पहचाना जा सकता है और सलाह दी जा सकती है. या एक ओपन सोर्स मौसम की जानकारी के साथ-साथ तापमान और आद्रता सेंसर का उपयोग करके वास्तविक डाटा के माध्यम से तापमान और आद्रता सूचकांक के आधार पर किसानों को व्यक्तिगत सलाह और सुझाव भी प्रदान करेगा.

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