Home पशुपालन IVRI: कैसा हो पशुओं का खानपान, 10 दिन तक एक्सपर्ट देंगे टिप्स, तय होगा विजन 2047
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IVRI: कैसा हो पशुओं का खानपान, 10 दिन तक एक्सपर्ट देंगे टिप्स, तय होगा विजन 2047

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पशु पोषण विभाग में दस दिवसीय कार्यशाला में विचार रखते मेहमान.

नई दिल्ली. भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के पशुपोषण विभाग द्वारा रूमेन माइक्रोबायोलाॅजी तकनीक में उन्नत व्यावहारिक प्रशिक्षण पर एक दस दिवसीय उच्च कार्यशाला का शुभारम्भ किया गया. जिसमें देश के विभिन्न राज्यों राजस्थान, पंजाब, बिहार, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखण्ड से आये 20 ट्रेनीज ने हिस्सा लिया. वर्कशॉप विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी विभाग के साइंस एण्ड इंजीनियरिंग रिसर्च बोर्ड (एसईआरबी), नई दिल्ली द्वारा आयोजित की गई थी. इस दौरान संस्थान निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने कहा कि यह ट्रेनिंग कैंप पशु पोषण और रूमेन माइक्रोबायोलॉजी में अनुसंधान कार्य की तकनीकों के बारे में ओरवआल ओवरव्यू और एक्सपीरियंस देगा.

उन्होंने कहा कि विकसित भारत बनाने में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है तथा हमारे वैज्ञानिक एवं छात्र अपने-अपने नये-नये विचारों तथा शोधों से इसमें अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे. उन्होंने कहा कि 2047 के लक्ष्यों को साकार करने के लिए संस्थान में एक रोडमैप तैयार किया जा रहा है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पशु पोषण विभाग को अपने निर्धारित लक्ष्यों और भविष्य के रोडमैप के साथ तैयार रहना चाहिए.

तकनीक से कराया जा रहा रूबरू
इस अवसर पर संस्थान के संयुक्त निदेशक कैडराड डा. के.पी. सिंह ने इस पाठ्यक्रम को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस कार्यशाला में छात्रों को रूमेन माइक्रोबायाॅलोजी की क्लासिकल तथा आधुनिक तकनीक से रूबरू कराया जायेगा तथा विभिन्न प्रयोगात्मक परीक्षण भी कराये जायेगें. संयुक्त निदेशक शैक्षणिक डा. एस.के मेंदीरत्ता ने जुगाली करने वाले पशुओं के पोषण में व्यापक ज्ञान प्राप्त करने के लिए ट्रेनीज को नियमित रूप से सभी कक्षाओं में भाग लेने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने पाठयक्रम निदेशक से संस्थान के छात्रों को भी इसमें शामिल करने की अपील की.

मीथेन कम करने के लिए किए कार्य
इस अवसर पर संयुक्त निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. रूपसी तिवारी ने पशु पोषण विभाग के गौरवशाली इतिहास के बारे में बताते हुए कहा कि पशु पोषण विभाग का 100 वर्षों से भी अधिक का गौरवशाली इतिहास रहा है. तथा इस विभाग ने संस्थान के लिए अनेक तकनीकियां तथा नैदानिक विकसित किये हैं. इस विभाग ने पशुओं में मीथेन को कम करने के लिए भी उल्लेखनीय कार्य किये हैं. पशु पोषण विभाग के विभागाध्यक्ष डा. एल.सी चैधरी ने बताया कि पशु पोषण विभाग का प्राचीन गौरवमयी इतिहास रहा है. तथा विभाग में रूमेन माइक्रोबायोलौजी लैब की स्थापना सन् 1971 में की गयी थी तब से यह विभाग इस क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट सेवायें प्रदान कर रहा है.

​तमाम पहलुओं के बारे में बताया
पाठ्यक्रम निदेशक डा. अंजू काला ने इस अवसर पर सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि इस दौरान प्रतिभागियों को 43 व्याख्यान तथा प्रयोगात्मक भी कराये जायेंगे. ये व्याख्यान रूमेन माइक्रोबायोलाॅजी तथा रोमन पंथी पशुओं के पोषण के विभिन्न आयामों के बारे मे विस्तृत जानकारी दी जायेगी. कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डा. अंजू काला द्वारा किया गया. इस अवसर पर डा.ए.के.वर्मा, डा. नारायण दत्ता, डा. असित दास, डा. विश्व बन्धु चतुर्वेदी, डा. सुनील जाधव, डा. अभिषेक सक्सेना तथा डा. ओम सिंह सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष तथा वैज्ञानिक उपस्थित रहे.

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