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Animal Husbandry: पशुओं को चपेट में ले सकती है ये खतरनाक बीमारी, 187 शहर के लिए अलर्ट जारी

animal husbandary, neelee ravi Buffalo
नीली रावी का प्रतीकात्मक फोटो

नई दिल्ली. इसमें कोई शक नहीं है कि पशुपालन ऐसे कारोबार में तब्दील हो चुका है, जिसको करने पर फायदा ही फायदा है. यही वजह है कि किसान भाई खेती के अलावा पशुपालन की ओर रुख भी कर रहे हैं, लेकिन जब पशुओं को बीमारी लगती है तो सारा फायदा नुकसान में तब्दील हो जाता है. इसलिए जरूरी है कि पशुओं को बीमार न होने दिया जाए. ये तभी संभव है कि जब पशुपालक को पशुओं की होने वाली बीमारियों के बारे में जानकारी होगी. अगर जानकारी होगी तो पहले से एहतियात किया जा सकता है और पशुओं बीमार होने से उनका प्रोडक्शन कम होने से और मौत होने से बचाया जा सकता है.

जुलाई और अगस्त के महीने बारिश का महीना होता है. इस बार आईएमडी ने ज्यादा बारिश की उम्मीद भी जताई है तो ऐसे में पशुओं की देखरेख में जरा सी भी कोताही भारी पड़ सकती है. पशुओं को बेबेसियोसिस जैसे बीमारी का खतरा है. जिसमें पशुओं को पीलिया हो जाता है. वहीं कई और तरह की भी दिक्कतें होती हैं. इसलिए जरूरी है कि पशुओं का ख्याल रखा जाए. आइए इस आर्टिकल में हम आपको बता रहें कि कहां सबसे ज्यादा खतरा है और इस बीमारी के क्या लक्षण हैं.

सबसे ज्यादा खतरा इन राज्यों में
पशुओं के को लेकर काम करने वाली निविदा संस्था के मुताबिक देश के 89 शहरों में जुलाई के महीने में इस बीमारी का खतरा नजर आ रहा है जिसमें सबसे ज्यादा झारखंड के 25 जिले प्रभावित होंगे. वहीं उत्तर प्रदेश के 17 जिले प्रभावित हो सकते हैं. जबकि केरल में भी 12 शहरों में ये बीमारी पशुओं में फैल सकती है. इसके अलावा अगस्त के महीने में यह बीमारी और विकराल रूप ले सकती है. इस महीने शहरों का आंकड़ा 89 से बढ़कर 98 हो सकता है. जिसमें उत्तर प्रदेश के 27 जिले प्रभावित हो सकते हैं. जबकि झारखंड के 25 और केरल के 10 जिले इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं.

क्या है इस बीमारी के लक्षण
यहां हम जिक्र करने जा रहे हैं बेबेसियोसिस बीमारी के बारे में, जिसे हम रेड वाटर फीवर भी कहते हैं. इसका खतरा देश में बढ़ रहा है. इस बीमारी में बुखार, एनीमिया, तेज बुखार, कॉफी के रंग का मूत्र निकलना आम है. जबकि हीमोग्लोबिनुरिया, पीलिया, हेमोलिटिक संकट से स्पष्ट, सबक्लिनीकल संक्रमण, बेबियोसिस पाइरेक्सिया के तीव्र रूप में, कमजोरी, श्लेष्मा झिल्ली का पीलापन, अवसाद, अस्वस्थता, एनोरेक्सिया, सांस लेन और हृदय गति में तेजी, हीमोग्लोबिनुरिया.बी.बोविस की भागीदारी केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, बी. गिब्सनी संक्रमण में पीलिया असामान्य है.

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