Home मछली पालन Fisheries: ज्यादा उत्पादन लेने के लिए मछली के तालाब में कितना डालना डालना चाहिए फर्टिलाइजर्स, जानें यहां
मछली पालन

Fisheries: ज्यादा उत्पादन लेने के लिए मछली के तालाब में कितना डालना डालना चाहिए फर्टिलाइजर्स, जानें यहां

Interim Budget 2024
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. मछली पालन में भी अच्छी खासी कमाई की जाती है. यही वजह है कि सरकार भी मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए कोशिशें कर रही है. अगर आप भी मछली पालन से कमाई करना चाहते हैं तो जरूरी है कि मछली पालन से जुड़ी तमाम अहम जानकारियां कर लें. मसलन मछली बीज कब डालना है. फीड की मात्रा आदि. एक्सपर्ट का कहना है कि मछ​ली पालन फर्टिलाइजर्स का भी अहम रोल होता है. इससे मछली पालन में प्रोडक्शन पर असर पड़ता है. कोई भी मछली पालक है तो वो चाहेगा कि ज्यादा से ज्यादा उत्पादन हासिल करे. इसके लिए जरूरी है कि उसे ये भी पता हो कि फर्टिलाइजर्स का कितना और कब इस्तेमाल करना है.

एक्सपर्ट का कहना है कि मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने के लिए तालाब के मिट्टी और पानी में पाये जाने वाले आवश्यक तत्वों की कमी को पूरा करने के लिए ही फर्टिलाइजर्स का इस्तेमाल किया जाता है. इससे मछलियों की ग्रोथ तेजी से होती है और उत्पादन भी ज्यादा होता है. इस वजह से फसल जल्दी तैयार होती है और इससे मुनाफा भी अच्छा होता है.

रसायनिक खाद कब डालें
फिश एक्सपर्ट के मुताबिक जैविक खाद के उपयोग के 15 दिन के बाद रसायनिक खाद के मिश्रण का छिड़काव करना चाहिए. इससे मछली पालन में फायदा होगा. वहीं तीन साल से ज्यादा पुराने तालाब में यूरिया का प्रयोग नहीं करना चाहिए. चूना का इस्तेमाल हमेशा जैविक एवं रसायनिक उर्वरक के प्रयोग से 1-2 दिन पहले कर लेना चाहिए. अगर तालाब के पानी का रंग हरा जो जाए तो रसायनिक खाद का प्रयोग करना बंद कर देना चाहिए, लेकिन पानी का रंग साफ होने पर रसायनिक खाद का इस्तेमाल करना चाहिए. विपरीत परिस्थिति में कम तापमान, बादल, कुहासा इत्यादि की स्थिति में खाद का प्रयोग बन्द कर देना चाहिए.

क्या-क्या तालाब में डालना चाहिए
एक्सपर्ट कहते हैं कि तालाब में चूना भी डाला जाता है. हर साल अगर एक हेक्टेयर का तालाब है तो 300 से 500 प्रोग्राम चूना डालना चाहिए. जैविक खाद के तौर पर मवेशी का गोबर हर साल एक हेक्टेयर में 10 टन डालना चाहिए. गोबर न डाला जाए तो वर्मी खाद हर साल एक हेक्टेयर में कम से कम 5 टन डाली जा सकती है. रासायनिक खाद में यूनिया 1 हेक्टेयर में 100 से 250 किलोग्राम हर साल डालना चाहिए. सुपर फास्फेट हर साल 150 से 200 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर डालना चाहिए. म्यूरेट पोटाश हर साल एक हेक्टेयर में 80 से 200 किलोग्राम डालना चाहिए.

Written by
Livestock Animal News Team

Livestock Animal News is India’s premier livestock awareness portal dedicated to reliable and timely information.Every news article is thoroughly verified and curated by highly experienced authors and industry experts.

Related Articles

मछली पालन

Fisheries: प्रोडक्ट ब्रांडिंग और स्मार्ट पैकेजिंग जैसे कामों से भी फिशरीज सेक्टर में कर सकते हैं ग्रोथ

नई दिल्ली. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन मैनेजमेंट (MANAGE) फिशरीज इनोवेशन एंड...

मछली में कुछ बीमारियां ऐसी हैं जो पूरे मछली के बिजनेस को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
मछली पालन

Fish Production: छत्तीसगढ़ में हुआ दोगुना मछली उत्पादन, 10 लाख टन पहुंचा प्रोडक्शन

नई दिल्ली. केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग...

Deep Sea fishing vessels, Ice Plants, Livelihood & Nutritional Support have been implemented in Kakinada District.
मछली पालन

Fish Farming: मछली पालकों की आर्थिक सुरक्षा बढ़ाई गई, छत्तीसगढ़ में हुए कई विकास कार्य

नई दिल्ली. मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग ने...

यहां मानसून जून से सितम्बर तक चलता है. औसत वर्षा करीब 57 सेमी. होती है.
मछली पालन

Fish Farming: बाजार में मछली की गिरती कीमतों के बीच सरकार ने दी मछली पालकों को राहत

नई दिल्ली. आंध्र प्रदेश सरकार ने जानकारी दी है कि ई-फिश प्लेटफॉर्म...