Home मछली पालन Fish Farming: इस तरह मछली पालन करने से होता है दोगुना फायदा, कई किसान कमा रहे हैं लाखों रुपये
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Fish Farming: इस तरह मछली पालन करने से होता है दोगुना फायदा, कई किसान कमा रहे हैं लाखों रुपये

तालाब में खाद का अच्छे उपयोग के लिए लगभग एक सप्ताह के पहले 250 से 300 ग्राम प्रति हेक्टेयर बिना बुझा चूना डालने की सलाह एक्सपर्ट देते हैं.
तालाब में मछली निकालते मछली पालक

नई दिल्ली. हर किसान की चाहत होती है कि वो कृषि में ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा सके. फिश एक्सपर्ट का कहना है कि अगर किसान खेती के साथ—साथ फिश ​फार्मिंग भी करें तो उनको दोगुना फायदा हो जाएगा. फिश एक्सपर्ट की मानें तो मछली पालन में 60 से 70 फीसद खर्च तो उनके दाने (फीड) पर होता है. जबकि अन्य खर्च अलग से हैं. जिसमें तालाब का मेंटीनेंस और मछलियों की दवा. जबकि दाने पर आने वाले खर्च को कैसे कम से कम किया जाए जिससे मछली पालन को बढ़ावा मिले इस पर कई संस्थान रिसर्च जारी है. अगर मछली मांसाहारी है तो तालाब में मछली के साथ बत्तख भी पाली जा सकती है.

दरअसल, पानी में रहने के दौरान बत्तख बीट भी तालाब में ही कर देती है. जिसे तालाब की मछलियां बड़े ही चाव से खाती हैं. जबकि पोल्ट्री फार्म से मुर्गे-मुर्गी की बीट लाकर भी तालाब में डाली जा सकती है. जो आसानी से कम कीमत पर मिल जाएगी.

तालाब के पानी का खेत में करते हैं इस्तेमाल
खेती के साथ मछली पालन के उदाहरण को समझाते हुए हरियाणा के मछली पालक मुनेंद्र शेरावत कहते हैं कि मछली के तालाब का पानी खेत में लगी फसलों के लिए बहुत ही मुफीद होता है. उनके पास दो एकड़ जमीन पर तालाब है, इसमें मछली पालन भी करते हैं. जबकि तालाब के पास ही मौजूद उनकी पर मौसम के हिसाब से फसल लगाई जाती है. मछली पालन के हिसाब से तालाब का पानी एक साल में तीन बार बदल दिया जाता है. इस दौरान तालाब के पानी को बदलने के दौरान फेंकने की बजाय खेत में ही इस्तेमाल करते हैं.

मछलियां बना लेती हैं अपनी खुराक
इससे धान के खेत में पानी की ओर आकर्षित होने वाले दर्जनों तरह के कीट मडराते रहते हैं. जिसमें मच्छर भी होता है. आबादी के पास भी मच्छरों का खासा प्रकोप रहता है. ऐसे में यदि आपका तालाब धान के खेत या फिर आबादी के आसपास है तो मछलियों को मच्छरों समेत उनका लार्वा मिल जाता है. धान की वजह से दूसरे कीट भी बड़ी संख्या में तालाब तक आते हैं. जिसे मछलियां अपनी खुराक बना लेती हैं. समझने वाली बात ये भी है कि अगर आपका मछली पालन का तालाब ग्रामीण इलाके में आबादी के आसपास है तो वहां भैंसे भी पाली जाती हैं. ऐसे में आप भैंस पालकों से बातकरके आप भैंस को तालाब में उतरवा सकते हैं, जब भैंस गोबर करेंगी तो मछलियों गोबर को भी अपनी खुराक बनाएंगी.

ये फीड भी होता है बहुत फायदेमंद
वहीं यूपी के मछली पालक एमडी खान कहते हैं कि तालाब में पाली जाने वाली मछलियों को दाने के रूप में ज्यादातर मछली पालक चावल और सरसों की खल (मस्टर्ड केक) देते हैं. इसके अलावा बाजार में भी कई तरह के फीड इसके लिए उपलब्ध हैं. ब्रीड के हिसाब से कुछ लोग पोल्ट्रीं फार्म की बीट भी मछलियों को देते हैं. अगर मछली मांगुर या उस जैसी ब्रीड की और दूसरी मछली हैं तो स्लॉटर हाउस से निकले वेस्ट को मिलाकर बनाया गया फीड भी दिया जा सकता है, जो बहुत ही फायदेमंद सौदा साबित हो सकता है.

Written by
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