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Seaweed: यहां बन रहा है भारत का पहला समुद्री शैवाल सेंटर, जानें इससे क्या होगा फायदा

seaweed
प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. भारत सरकार ने केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI) के मंडपम रीजन सेंटर को समुद्री शैवाल की खेती के लिए एक्सीलेंट सेंटर घोषित करके ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है. यह पहल भारत की समुद्री शैवाल (Seaweed) खेती क्षमताओं को आगे बढ़ाने और देश को समुद्री शैवाल (Seaweed) उद्योग में ग्लोबल लीडर के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. समुद्री शैवाल सेंटर की खेती में इनोवेशन और विकास के लिए एक राष्ट्रीय केंद्र के रूप में काम करेगा, जो खेती की तकनीकों को रिफाइंड करके बीज बैंक की स्थापना करने और टिकाऊ प्रथाओं को सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा.

इसका उद्देश्य खेती की क्षमता में सुधार, बीमारियों को नियंत्रित करने और इकोलॉजिकल बदलावों के अनुकूल होने के माध्यम से समुद्री शैवाल (Seaweed) की खेती को बढ़ाना है, जो हाई प्रोडक्टिविटी और बेहतर गुणवत्ता वाली पैदावार के लिए खेती के तरीकों को स्टैंडर्डाइज्ड और आधुनिक बनाएगा. स्वदेशी समुद्री शैवाल प्रजातियों की जेनेरेटिक वैरायटी को बनाए रखने और हाई क्वालिटी वाले पौधों की निरंतर आपूर्ति प्रदान करने के लिए एक समर्पित बीज बैंक की स्थापना की जाएगी. जिससे इस क्षेत्र में टिकाऊ विस्तार को बढ़ावा मिलेगा.

ज्वाइंट रिसर्च में मिलेगी मदद
इसके अलावा, केंद्र उत्पादन को अधिकतम करते हुए समुद्री इकोसिस्टम की सुरक्षा करने वाली टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए इकोलॉजिकल असर का आकलन करेगा. यह प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित करेगा, किसानों, उद्यमियों और सरकारी अधिकारियों के लिए समुद्री शैवाल की खेती, कटाई के बाद के प्रबंधन और संबद्ध उद्योगों में विशेष कार्यक्रम पेश करेगा. जिससे स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाया जा सकेगा और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा. समुद्री शैवाल की खेती को और आगे बढ़ाने के लिए, केंद्र वैश्विक संस्थानों और विशेषज्ञों के साथ सहयोग करेगा. जिससे फार्मास्यूटिकल्स, सौंदर्य प्रसाधन और बायो फ्यूल जैसे उद्योगों में समुद्री शैवाल के नए अनुप्रयोगों का पता लगाने के लिए ज्ञान के आदान-प्रदान और ज्वाइंट रिसर्च की सुविधा मिलेगी.

शैवाल बाजार में​ मिलेगी मजबूती
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री और पंचायती राज मंत्रालय राजीव रंजन सिंह ने 11 सितंबर 2024 को सुषमा स्वराज भवन नई दिल्ली में मनाए जाने वाले PMMSY की चौथी वर्षगांठ के दौरान मंडपम, तमिलनाडु में समुद्री शैवाल के लिए एक्सीलेंट केंद्र बनाने के लिए अधिसूचना का अनावरण किया है. मंडपम क्षेत्रीय केंद्र को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में घोषित करना भारत सरकार के “विकसित भारत 2047” के मद्दनेजर के अनुरूप है, जो टिकाऊ और समावेशी विकास के लिए एक रोडमैप है. समुद्री शैवाल उद्योग को बढ़ावा देकर, यह पहल समान आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी, तटीय क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी और वैश्विक समुद्री शैवाल बाजार में भारत की स्थिति को मजबूत करेगी.

127 करोड़ रुपये की मिली थी मंजूरी
यह भारत के तटीय समुदायों के लिए एक लचीले और संपन्न भविष्य की दिशा में एक रणनीतिक कदम का प्रतिनिधित्व करता है, जो नीली अर्थव्यवस्था के समग्र विकास में योगदान देता है और विकसित भारत 2047 के तहत तय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए राष्ट्र की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है. जैसे ही केंद्र अपना काम शुरू करता है, यह उम्मीद की जाती है कि यह मत्स्य पालन क्षेत्र में नवाचार, स्थिरता और विकास को बढ़ावा देगा. जिससे तटीय आजीविका के लिए एक ब्राइट र अधिक टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित होगा. तमिलनाडु में बहुउद्देश्यीय समुद्री शैवाल पार्क की स्थापना के लिए परियोजना को PMMSY के तहत दिसंबर, 2022 में 127.7 करोड़ रुपये के कुल निवेश के साथ मंजूरी दी गई थी.

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