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Meat: जानें बफैलो मीट ​एक्सपोर्ट से देश को कितनी होती है कमाई, चमड़े के बिजनेस के बारे में भी पढ़ें

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प्रतीकात्मक तस्वीर.

नई दिल्ली. विदेशों में भारत के बफैलो मीट की डिमांड बहुत है. खासतौर पर अरब देशों में तो भैंस के मांस की अच्छी खपत है. जिसके चलते बड़ी मात्रा में बफैला मीट एक्सपोर्ट किया जाता है. इससे जहां सरकार को टैक्स से भारी मुनाफा होता है तो वहीं आम किसानों को भी फायदा मिलता है. साल 2019 तक की पशुगणना की बात की जाए तो भारत में लगभग 109 मिलियन भैंसें हैं. जिन्हें मुख्य रूप से दूध के लिए पाला जाता है. हालां​कि मांस के लिए कोई विशेष नस्लें नहीं हैं लेकिन जो भैंस दूध देती रहती हैं और जब देना बंद कर देती हैं तो उन्हें स्लाटर हाउस भेज दिया जाता है. वहीं भैंस के बछड़े भी इसी काम में आते हैं.

ये कहा जाता सकता है कि भारत में भैंस का मांस डेयरी सेक्टर में इस्तेमाल हो रहे जानवरों के बाई प्रोडक्ट हासिल किया जाता है. भारत में मांस विज्ञान साहित्य का अधिकांश हिस्सा यह बताता है कि कुल मांस का केवल 2-3 फीसदी प्रोसेसिंग और मूल्य संवर्धन से गुजरता है. हालांकि, भारत में उत्पादित कुल मांस का 21 फीसदी से अधिक यानि 80 लाख लाख टन से ज्यादा मीट प्रोसेसिंग और मूल्य संवर्धन से गुजरता है.

90 फीसदी बफैलो मीट होता है प्रोसेस
सरकारी आंकड़ों पर गौर किया जाए तो भैंस का मांस ज्यादा प्रोसेसिंग होता है. जिसमें भारत में उत्पादित कुल भैंस के मांस का लगभग 90 फीसदी यानि (1.5 मीट्रिक टन) ठंडा करने, पैकेजिंग, फ्रीजिंग और ब्रांडिंग से गुजरता है और फिर इसे विदेशों में एक्सपार्ट कर दिया जाता है. अधिकांश भैंस का मांस लगभग 82 अत्याधुनिक निर्यात स्लाटर हाउस में प्रोसेस किया जाता है, जो कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण APEDA के तहत अप्रूव हैं. ये प्रोसेसिंग यूनिट ठोस और तरल वेस्ट मैनेजमेंट के लिए सभी सुविधाएं प्रदान करती हैं और सभी गैर जरूरी अपशिष्ट और बाई प्रोडक्ट जैसे हड्डी, खून आदि को खाद में तब्दील करती हैं. जिसके बाद इसका इस्तेमाल रेंडरिंग या कंपोस्टिंग तकनीक में किया जाता है.

22 हजार करोड़ का हुआ बिजनेस
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में भैंस के मांस क्षेत्र से वेस्ट सीमित (चमड़ा निर्यात परिषद) है. उसके आंकड़ों के मुताबिक भारत से कुल चमड़े और चमड़े के सामान का निर्यात अप्रैल 2019 से 2020 के दौरान 507 करोड़ अमेरिकी डॉलर था. लगभग 3500 कंपनियां चमड़ा और चमड़े के उत्पादों का निर्माण या निर्यात कर रही हैं और CLE की सदस्य हैं. भारत में उत्पादित और निर्यात किए गए चमड़े का लगभग 40 फीसदी भैंसों से आता है, जबकि 30 फीसदी बकरियों से आता है. वहीं APEDA के आंकड़ों को देखें तो भारत से भैंस के मांस का निर्यात (1.15 मीट्रिक टन) वर्ष 2019-20 के दौरान 22,669 करोड़ रुपये का योगदान दिया है.

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