नई दिल्ली. भारत के कानून में भी अवारा कुत्तों की संख्या पर कंट्रोल करने का प्रावधान है. संविधान के अनुच्छेद 246(3) के अनुसार के मुताबिक पशुधन का संरक्षण, सुरक्षा और सुधार, साथ ही पशु रोगों की रोकथाम, पशु चिकित्सा प्रशिक्षण और प्रैक्टिस, राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आता है. अनुच्छेद 243(डब्ल्यू) और 246 के अनुसार, स्थानीय निकायों को आवारा कुत्तों की जनसंख्या पर नियंत्रण करने का निर्देश दिया गया है. जिसको लेकर अभियान भी चलाया जाता है लेकिन बावजूद इसके आवारा कुत्तों की संख्या में कोई कमी नहीं दिखाई देती है. अलबत्ता बढ़ ही रही है.
इसके चलते आए दिन कुत्तों के काटने की वजह से लोग जख्मी हो रहे हैं. ये कहा जाता था कि कुत्ते ज्यादतर गर्मी के दिनों में लोगों पर हमला करते हैं लेकिन अब ठंड में भी कुत्ते लोगों को काट रहे हैं. सरकारी आंकड़ों की मानें तो तकरीबन एक करोड़ लोगों को कुत्तों ने अपना निशाना बनाया है.
इस विभाग पर पर है कंट्रोल करने की जिम्मेदारी
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) पर कुत्तों की संख्या पर कंट्रोल करने की जिम्मेदारी है. यही विभाग इंसानों में रेबीज से संबंधित मानव स्वास्थ्य को लेकर जिम्मेदार है. राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत, जानवरों के काटने के डेटा को इकट्ठा किया गया है. जिसमें बच्चों जैसे उच्च जोखिम वाले समूह शामिल हैं. हालांकि देश भर में सभी जानवरों के काटने के पीड़ितों के लिए पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस के लिए जरूरी व्यवस्था की जा रही है. भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, 2022 से 2025 (जनवरी तक) तक राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा रिपोर्ट किए गए कुत्ते के काटने के मामलों राज्यवार डेटा भी जारी किया है.
किस साल कितने मामले आए सामने
कुत्तों के हमले के शिकार हुए लोगों के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो साल 2022 से 25 में लाखों लोगों को कुत्तों ने दिसंबर और जनवरी के महीने में लोगों को काटा है. देश के सभी राज्यों में साल 2022 में 21 लाख 89 हजार 909 लोगों को कुत्तों ने काटा है. जबकि 2023 में जनवरी और दिसंबर के महीने में 30 लाख 52 हजार 521 लोगों को कुत्तों ने अपना शिकार बनाया है. वहीं दिसंबर और जनवरी 2024 में सभी राज्यों में 31 लाख 15 हजार 713 लोग कुत्तों के निशाना बने हैं. साल 2025 के आंकड़े की बात की जाए तो संख्या भले ही कम है लेकिन कुत्तों का हमला करने का सिलसिला जारी रहा है. जनवरी के महीने में 4 लाख 29 हजार 664 लोगों को कुत्तों ने अपना शिकार बनाया है. सबसे ज्यादा जिन राज्यों में मामले आए हैं. उसमें उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, छत्तीसगढ़, बिहार और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं. लक्षद्वीप में एक भी मामला पिछले 3 साल में सामने नहीं आया है.












